बेमेतरा, (28 नवंबर 2025): साल 2025 का अंतिम महीना दिसंबर, हिंदू धर्म के कई महत्वपूर्ण त्योहारों और व्रत-उपवासों के साथ-साथ पौष माह की शुरुआत लेकर आ रहा है। यह महीना जहां एक ओर सूर्य देव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है, वहीं महीने के मध्य में लगने वाले खरमास के कारण विवाह और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर अस्थायी विराम लग जाएगा।
☀️ पौष माह और सूर्य उपासना का महत्व
ज्योतिषाचार्य कृष्ण नंदन शर्मा ने बताया, “दिसंबर की शुरुआत 5 तारीख से पौष माह (मार्गशीर्ष पूर्णिमा के बाद) के साथ होगी। हिंदू पंचांग में पौष माह को सूर्य पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान सूर्य देव को अर्घ्य देने और उनकी उपासना करने से व्यक्ति को यश, आरोग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।”
🛑 16 दिसंबर से खरमास, मांगलिक कार्यों पर रोक
पंचांग के अनुसार, 16 दिसंबर 2025 (मंगलवार) को सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास (धनु संक्रांति) शुरू हो जाएगा।
ज्योतिषाचार्य शर्मा के अनुसार, “खरमास की अवधि में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और नए व्यापार की शुरुआत जैसे सभी शुभ कार्य वर्जित होते हैं। शुभ कार्यों पर यह रोक पूरे एक महीने यानी मकर संक्रांति तक जारी रहेगी।”
🚩 दिसंबर 2025 के प्रमुख व्रत-त्योहार:
- मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती: 1 दिसंबर
- मार्गशीर्ष पूर्णिमा, अन्नपूर्णा जयंती: 4 दिसंबर
- पौष माह आरंभ: 5 दिसंबर
- सफला एकादशी: 15 दिसंबर
- खरमास/धनु संक्रांति: 16 दिसंबर
- पौष अमावस्या: 19 दिसंबर
- क्रिसमस: 25 दिसंबर
- गुरु गोबिंद सिंह जयंती: 27 दिसंबर
- पौष पुत्रदा एकादशी: 30 दिसंबर
दिसंबर माह में भक्तों को मोक्षदा, सफला और पुत्रदा एकादशी जैसे महत्वपूर्ण व्रत रखने का अवसर मिलेगा, जबकि महीने के अंत में पौष अमावस्या और नए साल की पूर्व संध्या पर कूर्म द्वादशी जैसे पर्व भी मनाए जाएंगे।

