नक्सल उन्मूलन की दिशा में छत्तीसगढ़ पुलिस को आज एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। राजनांदगांव रेंज में एक बड़ी कार्रवाई के तहत, एमएमसी (मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़) जोन के अंतर्गत सक्रिय प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के सीसीएम (Central Committee Member) सदस्य रामधेर उर्फ होरूपु उर्फ अमरजीत उर्फ देउ मज्जी सहित कुल 12 शीर्ष और शस्त्रधारी माओवादियों ने आज हथियार डाल दिए और समाज की मुख्यधारा से जुड़ गए।
आत्मसमर्पित नक्सलियों पर एमएमसी जोन में कुल ₹2 करोड़ 95 लाख का ईनाम घोषित था।
💰 शीर्ष कमांडर पर ₹1 करोड़ 5 लाख का ईनाम
आत्मसमर्पित करने वालों में रामधेर सबसे बड़ा नाम है, जिस पर अकेले ₹1 करोड़ 5 लाख का ईनाम घोषित था। उनके साथ आत्मसमर्पण करने वालों में 4 डीवीसीएम (Divisional Committee Member) शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक पर ₹33 लाख का ईनाम था।

आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख नक्सली:
- रामधेर उर्फ होरूपु उर्फ अमरजीत उर्फ देउ मज्जी (उम्र 53 वर्ष): सीसीएम एमएमसी जोन, ईनाम – ₹1 करोड़ 5 लाख।
- चंदू उर्फ नरेष (उम्र 55 वर्ष): डीवीसीएम, टाण्डा-मलाजखण्ड एरिया कमेटी सचिव।
- अनीता उर्फ ललीता उर्फ जैनी (उम्र 35 वर्ष): डीवीसीएम, टाण्डा-मलाजखण्ड एरिया कमेटी।
- प्रेम उर्फ उमराव (उम्र 32 वर्ष): डीवीसीएम, टाण्डा-मलाजखण्ड एरिया कमेटी।
- जानकी उर्फ प्रेमा उर्फ लिमी (उम्र 35 वर्ष): डीवीसीएम, टाण्डा-मलाजखण्ड एरिया कमेटी।
इन 12 माओवादियों ने कुल 10 हथियार भी सौंपे, जिनमें 03 एके-47 राइफलें, 01 एसएलआर, 03 इंसास राइफलें, 02 .303 राइफलें, और 01 .30 कार्बाइन शामिल हैं।

पुनर्वास से पुनर्जीवन’ की ओर कदम
पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़ श्री अरूण देव गौतम (भापुसे), अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, नक्सल ऑपरेशन श्री विवेकानंद (भापुसे), पुलिस महानिरीक्षक राजनांदगांव रेंज श्री अभिषेक शांडिल्य (भापुसे), और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में नक्सलियों ने पुनर्वास के लिए आत्मसमर्पण किया।
अधिकारियों ने बताया कि नक्सलियों ने शासन की ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025’ से प्रभावित होकर और संगठन की खोखली विचारधारा, शोषण, अत्याचार, और हिंसा से तंग आकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।
🎯 सुरक्षा बलों की रणनीति का परिणाम
राजनांदगांव रेंज पुलिस द्वारा चलाए जा रहे निरंतर नक्सल विरोधी अभियानों, सिविक एक्शन कार्यक्रमों (सामुदायिक पुलिसिंग), और विकास कार्यों का यह सीधा परिणाम है। सुरक्षा बलों ने बैनर, पोस्टर और पैम्फलेट के माध्यम से ग्रामीणों और नक्सलियों को पुनर्वास नीति के लाभों के बारे में लगातार जानकारी दी, जिससे प्रेरित होकर इन माओवादियों ने शांति का रास्ता चुना है।
पुलिस महानिरीक्षक, राजनांदगांव रेंज ने कहा, “सुरक्षा बलों की प्रभावी रणनीति, विकास कार्यों और सामुदायिक पुलिसिंग के परिणामस्वरूप नक्सलियों ने हिंसा का मार्ग त्यागते हुए समाज में सम्मानपूर्वक जीवनयापन करने की मंशा से आत्मसमर्पण किया है। यह कदम इस क्षेत्र में शांति स्थापना और नक्सल उन्मूलन अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।”


