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●खारुन नदी पर कुम्ही-बरतनारा एनीकट निर्माण में लापरवाही का आलम, गुणवत्ता से समझौता●*

*बेमेतरा:-* बेमेतरा ज़िले के अंतिम छोर एवं राजधानी रायपुर ज़िला क्षेत्र के सीमांचल पर खारुन नदी पर बाढ़ तथा जलसंकट को नियंत्रित करने एवं स्थानीय आवागमन व्यवस्था को सुगम बनने के लिए बहुप्रतीक्षित कुम्ही-बरतनारा एनीकट निर्माण कार्य करीब सालभर से निरन्तर चल रहा है। जिसमे इन दिनों कथित तौर पर निर्माण कंस्ट्रक्शन एजेंसी एवं ठेकेदार की मनमानी और विभागीय अनदेखी के कारण सवालों के घेरे में है।

स्थानीय लोगों और जल संसाधन विभाग के सूत्रों के अनुसार, निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखा गया है, जिससे परियोजना की गुणवत्ता और भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। ज्ञात हो कि महीनेभर पूर्व खारुन नदी के इस निर्माण स्पॉट पर किसी प्रकार सुरक्षागत बोर्ड व चेतावनी सूचक नही होने से एनीकट में पानी होने के बावजूद नदी के दोनों छोर से आवागमन हो रहा है जो काफी खतरनाक व जोखिम भरा था जिसमे भी सिंचाई विभाग की निष्क्रियता व नाकामी उजागर होती है। वही अब नदी का जलस्तर एनीकट से उतरने के पश्चात कार्य प्रगति में है जहां पर फिर ठेकेदार की मनमानी व लापरवाही देखने को मिल रही है।गौरतलब हो कि बेरला ब्लॉक के सरहद में स्थित कुम्ही गाँव में तकरीबन साढ़े आठ करोड़ की लागत फिलहाल विशाल एनीकट का निर्माण सालभर से दुर्ग की एक निर्माण एजेंसी द्वारा किया जा जा रहा है। जो बेमेतरा के बेरला ब्लॉक अंतर्गत कुम्ही गाँव मे अस्थायी कंस्ट्रक्शन प्लान्ट तैयार कर निर्माण का कामकाज किया जा रहा है। जिसमे स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि एनीकट के निर्माण में आसपास के गाँव से अवैध रूप में मिट्टी, खारुन नदी की रेत और निम्न-गुणवत्ता वाले पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे एनीकट की मजबूती व निर्माण कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहा है।इस दौरान जिम्मेदार ठेकेदार द्वारा निर्माण स्थल पर सीमेंट और रेत के मिश्रण में अनुपात की अनदेखी किए जाने का भी दावा किया जा है। जिसका प्रमाण एनीकट के निर्माण में स्पष्ट तौर के देखी जा सकती है। वही इस एनीकट निर्माण के दौरान, निर्माण सूचक बोर्ड, आवश्यक सुरक्षा घेरा और अन्य तकनीकी मानकों का उचित रूप से पालन नहीं किया जा रहा है।

*●दीगर ज़िले के प्रोजेक्ट होने से विभागीय निरीक्षण में उदासीनता●*

क्षेत्र के स्थानीय लोगों का कहना है कि यह क्षेत्र दो ज़िलों का विभाजन क्षेत्र है, जिसमे इस परियोजना को रायपुर जलसंसाधन विभाग द्वारा निर्मिति की जा रही है। जिसमे रायपुर के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों द्वारा निर्माण स्थल का नियमित और कड़ा निरीक्षण नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण ठेकेदार को मनमानी करने का मौका मिल रहा है।आमजनो की मांग है कि क्षेत्र में इतने बड़े परियोजना के निर्माण व क्रियान्वयन में काफी लापरवाही व मनमानी बरती जा रही है जिसपर विभाग को गम्भीरता से ध्यान देने की जरूरत है। खारुन नदी के इस अहम प्रोजेक्ट से सम्बंधित माइनर जलसंसाधन विभाग रायपुर के कार्यपालन अभियंता सन्दीप धवन एवं धरसीवां क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी-अक्षय सिंह से संपर्क किया गया किन्तु दोनों के द्वारा कोई प्रतिक्रिया नही दिया गया।

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