बेरला (छत्तीसगढ़): ब्लॉक बेरला के ग्राम मनियारी में आयोजित त्रि-दिवसीय श्री सद्गुरु कबीर सत्संग समारोह का भव्य समापन हुआ। इस आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में संत प्रेमी और ग्रामीण एकत्रित हुए, जहाँ उन्होंने महंत राजूदास साहेब के मुखारविंद से गुरु महिमा और कबीर के साखियों का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर
प्रवचन के दौरान महंत राजूदास साहेब ने संत कबीर के दर्शन को साझा करते हुए कहा कि सच्चा गुरु ईश्वर से भी बढ़कर है। उन्होंने कबीर दास जी के प्रसिद्ध दोहे ‘गुरु गोविंद दोऊ खड़े’ का उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि ईश्वर और गुरु दोनों सम्मुख हों, तो सर्वप्रथम गुरु के चरण स्पर्श करने चाहिए, क्योंकि गुरु ही वह माध्यम है जिसने हमें ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग दिखाया है।
प्रवचन के मुख्य बिंदु:
- भवसागर से मुक्ति: महंत जी ने बताया कि बिना गुरु के भक्ति अधूरी है। केवल ईश्वर की भक्ति करने वाले संसार के चक्र में उलझे रह जाते हैं, जबकि गुरु की कृपा जीव को जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त कर देती है।
- अनंत महिमा: उन्होंने गुरु के गुणों को अतुलनीय बताते हुए कहा कि यदि सातों समुद्रों को स्याही और पूरी पृथ्वी को कागज बना दिया जाए, तब भी गुरु की महिमा का वर्णन पूरा नहीं किया जा सकता।
- दिखावे का त्याग: कबीर के उपदेशों के माध्यम से मानवता और आत्म-ज्ञान पर जोर दिया गया, जिसमें आडंबरों को छोड़कर सरल जीवन जीने की सीख दी गई।
ईश्वर नाम के बिना जीवन व्यर्थ
सत्संग में कबीर साहब की वाणी— “कबीर, हरि के नाम बिना, राजा ऋषभ होए, माटी लड़ै कुम्हार कै, घास ना डाला कोए” —का विस्तार से अर्थ समझाया गया। महंत जी ने कहा कि ईश्वर के नाम और भक्ति के बिना एक वैभवशाली राजा का जीवन भी उस गधे के समान हो जाता है, जिससे कुम्हार कठोर परिश्रम तो करवाता है लेकिन बदले में उसे भोजन (घास) तक नसीब नहीं होता।
भक्तिमय हुआ वातावरण
तीन दिनों तक चले इस आयोजन में मनियारी सहित आस-पास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु कबीर के भजनों और ज्ञानमयी बातों को सुनकर प्रफुल्लित नजर आए। पूरा वातावरण “सत्य साहेब” के जयकारों से गुंजायमान रहा। कार्यक्रम के अंत में गुरु महिमा पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

