बेमेतरा | क्षेत्र में इन दिनों मौसम के बदले मिजाज ने जनजीवन और खेती-किसानी को प्रभावित कर दिया है। शुक्रवार सुबह से ही आसमान में छाई काली घटाओं ने जहां एक ओर बारिश की आशंका बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर कड़ाके की ठंड और संक्रमण के चलते लोग मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
बादलों के बावजूद ठंड बरकरार, अलाव का सहारा
आमतौर पर बादल छाने के बाद न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी महसूस की जाती है, लेकिन शुक्रवार को नजारा कुछ अलग रहा। आसमान में काली घटाएं छाए रहने के बावजूद ठंड के तीखेपन में कोई कमी नहीं आई। दिनभर लोग गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आए और ग्रामीण क्षेत्रों में लोग जगह-जगह अलाव जलाकर ठंड से राहत पाते दिखे।
किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
बेमौसम बदलते इस मौसम ने रबी की फसल लगा चुके किसानों को परेशानी में डाल दिया है। अंचल के किसान इस समय चना, तिवरा, अरहर और मसूर जैसी दलहन फसलों की देखरेख में जुटे हैं।
- कई किसान फसलों की दूसरी सिंचाई कर चुके हैं, तो कुछ तैयारी में थे।
- ऐसे में यदि बारिश होती है, तो तैयार हो रही फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है।
- बादलों के कारण फसलों में कीट व्याधि का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे किसान काफी चिंतित हैं।
अस्पतालों में बढ़ी सर्दी-खांसी के मरीजों की भीड़
मौसम में अचानक आए इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर आम जनमानस के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। कड़ाके की ठंड और अब बादलों वाले उमस भरे माहौल के कारण सर्दी, खांसी और गले में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं। क्षेत्र के निजी क्लीनिकों और सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ देखी जा रही है। डॉक्टरों ने इस समय विशेष सावधानी बरतने और ठंडी चीजों से परहेज करने की सलाह दी है।

