बेमेतरा/बेरला: जनपद पंचायत बेरला के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के पहिये थम गए हैं। 15वें वित्त और मूलभूत मद की राशि पिछले 11 महीनों से नहीं मिलने के कारण सरपंचों का धैर्य जवाब दे गया। मंगलवार को सरपंच संघ के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया, तहसील मुख्यालय का घेराव किया और बस स्टैंड पर चक्काजाम कर जमकर नारेबाजी की।

दुकानदारों के कर्ज और अपमान से परेशान हैं सरपंच
सरपंचों का कहना है कि फरवरी 2025 में निर्वाचित होने के बाद से वे अपने स्तर पर बिजली, पेयजल, स्वच्छता और मोटर रिपेयरिंग जैसे अनिवार्य कार्य करवा रहे हैं। लेकिन राशि नहीं आने के कारण अब वे कर्ज के बोझ तले दब गए हैं।
सरपंचों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “सामग्री प्रदाता और दुकानदार बार-बार पैसों के लिए तगादा कर रहे हैं। हमें अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। पंचायत चलाना अब दूभर हो गया है।”
चरणबद्ध तरीके से हुआ विरोध प्रदर्शन
सरपंच संघ ने अपने आंदोलन को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया:
- समीक्षा बैठक: सर्वप्रथम जनपद पंचायत में रणनीति तैयार की गई।
- जनपद घेराव: दोपहर 1 बजे सीईओ दीप्ति मंडावी के कार्यालय का घेराव कर ज्ञापन सौंपा।
- चक्काजाम: दोपहर 1:30 बजे बेरला बस स्टैंड पर आवागमन बाधित कर विरोध जताया।
- प्रशासनिक घेराव: इसके पश्चात एसडीएम दीप्ति वर्मा और तहसीलदार डॉ. आशुतोष गुप्ता के कार्यालय का घेराव कर उन्हें शासन के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
“सांस और जल की तरह जरूरी है पंचायत फंड”
प्रदर्शन में शामिल महिला सरपंचों ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जिस प्रकार जीवन के लिए सांस और जल अनिवार्य है, उसी प्रकार पंचायत चलाने के लिए 15वें वित्त की राशि अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि विकास कार्य रुकने से जनता का विश्वास टूट रहा है और सरकार की छवि खराब हो रही है। सरपंचों ने दो टूक कहा, “हम दूसरी बार सरपंच बनें न बनें, लेकिन अगर यही स्थिति रही तो सरकार जरूर बदल जाएगी।”
प्रमुख उपस्थिति
इस आंदोलन का नेतृत्व सरपंच संघ के अध्यक्ष रघुवीर पिंटू सिन्हा ने किया। प्रदर्शन में ब्लॉक की समस्त ग्राम पंचायतों के सरपंच और प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सरपंचों ने मांग की है कि शासन जल्द से जल्द राशि जारी करे, अन्यथा आने वाले समय में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

