बेरला (छत्तीसगढ़) | ब्लॉक बेरला के अंतर्गत सेवा सहकारी समिति मर्यादित लेंजवारा (पंजीयन क्रमांक 387) में धान खरीदी इस समय गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। समिति में धान की रिकॉर्ड आवक और परिवहन (उठाव) की कछुआ चाल ने प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वर्तमान में यहाँ शासन द्वारा निर्धारित बफर लिमिट से चार गुना ज्यादा धान जमा हो चुका है, जिससे केंद्र में अब तिल रखने की भी जगह नहीं बची है।
आंकड़ों में समझें संकट की गंभीरता
समिति से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खरीफ वर्ष 2025-26 के लिए स्थिति कुछ इस प्रकार है:
| विवरण | विवरण/आंकड़े |
|---|---|
| कुल पंजीकृत रकबा | 1328.28 हेक्टेयर |
| कुल खरीदी लक्ष्य | लगभग 60,000 क्विंटल |
| अब तक हुई खरीदी | 35,228.40 क्विंटल |
| निर्धारित बफर लिमिट | 7,200 क्विंटल |
| वर्तमान में फड़ पर मौजूद स्टॉक | 27,626.40 क्विंटल |

खुले आसमान के नीचे ‘अन्नदाता’ की मेहनत
समिति प्रबंधन का कहना है कि बफर लिमिट मात्र 7,200 क्विंटल की है, लेकिन उठाव न होने के कारण 27,000 क्विंटल से अधिक धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है। जगह की भारी कमी के कारण अब नए किसानों से धान लेना लगभग असंभव हो गया है। यदि जल्द ही मिलर्स या संग्रहण केंद्रों के लिए परिवहन शुरू नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में खरीदी पूरी तरह बंद हो सकती है।

प्रशासनिक सुस्ती से किसानों में बढ़ी चिंता
समिति ने जिला विपणन अधिकारी को पत्र लिखकर त्वरित परिवहन की मांग की है। वहीं, क्षेत्र के किसानों में इस बात को लेकर भारी चिंता है कि यदि खरीदी केंद्र फुल हो गया, तो वे अपनी मेहनत की फसल लेकर कहाँ जाएंगे। खुले में रखे धान पर मौसम की मार और सुरक्षा का खतरा भी मंडरा रहा है।
समिति प्रबंधन का पक्ष: “धान का उठाव समय पर नहीं होने से फड़ पूरी तरह भर चुका है। हमने विभाग को अवगत करा दिया है। जब तक पिछला धान नहीं उठेगा, नया धान उतारना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।”
अब सबकी नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह कब इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेकर धान का परिवहन शुरू करवाता है, ताकि क्षेत्र के किसानों को राहत मिल सके।


