बेरला (बारगांव): विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और किताबी ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने के उद्देश्य से विकासखण्ड बेरला के ‘देव पब्लिक स्कूल बारगांव’ द्वारा एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इस दौरान स्कूली बच्चों ने महासमुंद जिले के प्रसिद्ध धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत को करीब से समझा।
चंडी माता मंदिर में भक्ति और अनुशासन का संगम
भ्रमण की शुरुआत बागबाहरा स्थित प्रसिद्ध घुंचापाली चंडी माता मंदिर से हुई। बच्चों ने माता के दर्शन किए और वहां के प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठाया। मंदिर परिसर में ही बच्चों ने एक साथ बैठकर गृह-निर्मित भोजन किया, जिससे उनमें सामूहिकता और अनुशासन की भावना देखने को मिली। बच्चों ने मंदिर परिसर से स्मृतियां और प्रसाद भी संग्रहित किए।
खल्लारी की पहाड़ियों पर दिखा गजब का उत्साह
भ्रमण का अगला और सबसे रोमांचक पड़ाव खल्लारी माता मंदिर रहा। विद्यार्थियों का उत्साह देखने लायक था; बच्चों ने लगभग 900 सीढ़ियों की चढ़ाई को महज 20 मिनट में पूरा कर लिया। पहाड़ी की चोटी से प्रकृति के विहंगम दृश्यों ने बच्चों और साथ गए अभिभावकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इतिहास और पौराणिक साक्ष्यों का प्रत्यक्ष अनुभव
शिक्षकों ने बच्चों को खल्लारी के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व से अवगत कराया। महाभारत काल से जुड़े इस क्षेत्र में बच्चों ने ‘भीम पांव’ और ‘भीम चूल’ जैसे प्राचीन साक्ष्यों को प्रत्यक्ष देखा। विद्यार्थियों ने बताया कि किताबों में पढ़ी गई बातों को सामने देखने से उन्हें इतिहास को समझने में काफी मदद मिली।
शिक्षक और पालकों का रहा विशेष सहयोग
इस यात्रा को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकों और पालकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा:
- शिक्षक गण: चेतन लाल यादव, फूलचंद निषाद, द्रौपदी निषाद, भारती साहू, नगीना साहू, तरन्नुम निशा और मनीषा निषाद।
- अभिभावक: राजकुमारी वर्मा, सीमा वर्मा, ऊदल साहू, भूषण साहू, मेघनाथ साहू, विष्णु साहू और दिलेंद्र निषाद।
स्कूल प्रबंधन का संदेश:
स्कूल प्रबंधन ने इस सफल यात्रा पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यदि प्रकृति का वास्तविक आनंद लेना है और ऐतिहासिक धरोहरों को गहराई से समझना है, तो खल्लारी और घुंचापाली का भ्रमण हर विद्यार्थी के लिए प्रेरणादायक है।

