खैरागढ़-छुईखदान-गंडई। साइबर अपराधियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ की खैरागढ़ पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के ‘समन्वय पोर्टल’ से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा किया है। इस पूरे खेल में ‘म्युल अकाउंट्स’ (किराये के बैंक खाते) के जरिए अवैध धन का लेन-देन किया जा रहा था।
बैंक ऑफ महाराष्ट्र में मिला 8.65 करोड़ का संदिग्ध ट्रांजैक्शन
पुलिस की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि बैंक ऑफ महाराष्ट्र, शाखा खैरागढ़ के कुछ खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को खपाने के लिए किया जा रहा था। जांच के दौरान इन खातों में कुल ₹8.65 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन की पुष्टि हुई है। साइबर ठग इन खातों का उपयोग धनराशि को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए कर रहे थे।
रायपुर में नाम बदलकर छिपा था मुख्य आरोपी
इस मामले में पुलिस पहले ही तीन म्युल खाताधारकों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। विवेचना के दौरान चुरेन्द्र वर्मा नामक एक और आरोपी की संलिप्तता पाई गई। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए रायपुर में अपना नाम और पता बदलकर छिपा हुआ था। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे रायपुर से धर दबोचा और न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
क्या होते हैं म्युल खाते (Mule Accounts)?
साइबर फ्रॉड की दुनिया में ‘म्युल अकाउंट’ उन खातों को कहा जाता है, जिन्हें ठग सीधे-सादे लोगों को लालच देकर या उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर खुलवाते हैं। इन खातों का इस्तेमाल अवैध पैसे को घुमाने और पुलिस की नजरों से बचने के लिए किया जाता है।
पुलिस की चेतावनी: “खैरागढ़–छुईखदान–गंडई पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है। इस सिंडिकेट से जुड़े सोर्स और अन्य संदिग्ध बैंक खातों की गहराई से जांच की जा रही है। जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।”

