बेमेतरा | जिले के बेरला जनपद अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मोहभट्टा में बीते डेढ़ साल से विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। खनिज न्यास निधि (DMF) की राशि में हुई भारी वित्तीय गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद जिला प्रशासन ने पंचायत का बैंक खाता सीज कर दिया था। तब से लेकर अब तक, दोषियों पर कार्रवाई और खाता बहाली की मांग को लेकर सरपंच और जनप्रतिनिधि दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन परिणाम शून्य रहा है।
18 महीनों से केवल ‘आश्वासन’ का खेल
वर्तमान सरपंच और उनकी टीम का आरोप है कि पिछले 18 महीनों के दौरान उन्होंने जिला पंचायत सीईओ और जनपद सीईओ से कई बार गुहार लगाई। हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। अधिकारियों के इस ढुलमुल रवैये के कारण पंचायत में बुनियादी सुविधाएं और विकास कार्य पूरी तरह रुक गए हैं।
जनदर्शन और बैठकों का दौर: बेअसर रही कोशिशें
मामले की गंभीरता को देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने कई स्तरों पर प्रयास किए:
- 2 फरवरी 2026: सरपंच और उनकी टीम ने जिलाधीश के जनदर्शन में शिकायत की। एक सप्ताह में कार्रवाई का भरोसा मिला, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
- जनपद पंचायत बैठक: सामान्य सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर राशि वसूली के लिए एसडीएम को जांच रिपोर्ट सौंपी गई, फिर भी फाइल आगे नहीं बढ़ी।
- सीईओ का कथित इनकार: सरपंच का आरोप है कि जब उन्होंने जनपद सीईओ से मुलाकात की, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कार्रवाई करने से मना कर दिया।
- 16 मार्च 2026: जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रतिनिधि बलराम पटेल, जनपद सदस्य नीरज राजपूत और सरपंच ने पुनः कलेक्टर से मुलाकात कर दस्तावेजों के साथ अपनी बात रखी। यहाँ भी मामला ‘ठंडे बस्ते’ में डाल दिया गया।
अंतिम अल्टीमेटम: 7 दिन के भीतर कार्रवाई की मांग
प्रशासनिक उदासीनता से आक्रोशित होकर 30 मार्च 2026 को ग्राम पंचायत सरपंच और उनके दल ने जिलाधीश से मिलकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि:
”यदि अगले सात दिनों के भीतर भ्रष्टाचार के दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जाती और पंचायत के रुके हुए कार्यों को गति नहीं दी जाती, तो समस्त जनप्रतिनिधि और ग्रामवासी मिलकर कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे।”
प्रमुख मांगें:
- खनिज न्यास राशि में हुए भ्रष्टाचार के दोषियों पर तत्काल एफआईआर और रिकवरी।
- पंचायत का सीज किया गया खाता तुरंत बहाल किया जाए।
- ग्राम विकास के रुके हुए कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस अल्टीमेटम के बाद जागता है या ग्रामीणों को आंदोलन की राह पकड़नी पड़ती है।

