भिलाई, छत्तीसगढ़: बागेश्वर धाम के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान भिलाई पहुंचे। यहाँ आयोजित भव्य कार्यक्रम में उन्होंने एक बार फिर अपने प्रखर अंदाज में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने मंच से हुंकार भरते हुए हिंदुओं को एकजुट होने की कड़ी चेतावनी दी और बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए भारत के भविष्य के प्रति आगाह किया।
बांग्लादेश की हिंसा पर जताई चिंता
अपने संबोधन में धीरेंद्र शास्त्री ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का जिक्र किया। उन्होंने विशेष रूप से हिंदू युवक दीपू दास की हत्या का उल्लेख करते हुए इसे एक गंभीर चेतावनी करार दिया। शास्त्री ने कहा, “आज बांग्लादेश में हिंदू होना गुनाह बन गया है। अगर भारतीय हिंदू अब भी नहीं जागे और संगठित नहीं हुए, तो छत्तीसगढ़ और पूरे भारत में भी वैसी ही स्थिति पैदा होने में देर नहीं लगेगी।”
‘हिंदू राष्ट्र’ की मांग और पदयात्रा का ऐलान
शास्त्री ने ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ का नारा देते हुए एक बार फिर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की अपनी प्रतिज्ञा दोहराई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक भारत को संवैधानिक रूप से हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं किया जाता, तब तक उनका यह अभियान और उनकी यात्राएं जारी रहेंगी।
इसी कड़ी में उन्होंने छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ी घोषणा भी की:
- छत्तीसगढ़ पदयात्रा: राज्य में जल्द ही एक विशाल हिंदू जागरूकता पदयात्रा निकाली जाएगी।
- तैयारियां पूर्ण: उन्होंने बताया कि इस यात्रा की रूपरेखा और तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
धर्मांतरण और जातिवाद पर कड़ा प्रहार
समाज में व्याप्त कुरीतियों पर बोलते हुए बागेश्वर सरकार ने कहा कि देश की प्रगति जातिवाद से नहीं बल्कि राष्ट्रवाद से संभव है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में बढ़ते धर्मांतरण के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके तीन मुख्य कारण बताए:
- आर्थिक तंगी: गरीबी का फायदा उठाकर लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।
- अशिक्षा: जानकारी के अभाव में लोग बहकावे में आ जाते हैं।
- अंधविश्वास: समाज में फैला भ्रम धर्मांतरण की जड़ें मजबूत कर रहा है।

