बिलासपुर। जिला न्यायालय के पास हुए दर्दनाक सड़क हादसे में बिलासपुर पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपियों के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। तहसीलदार के बेटे मनिंद्र भूषण श्याम की मौत के मामले में सिविल लाइन पुलिस ने केवल दुर्घटना की साधारण धाराएं न लगाकर, ट्रक चालक और निर्माणधीन भवन के ठेकेदार के खिलाफ ‘गैर-इरादतन हत्या’ का मामला दर्ज किया है।
लापरवाही ने ली मासूम की जान
घटना बीते मंगलवार सुबह की है, जब जिला न्यायालय के पास एक निर्माणाधीन बिल्डिंग में सामग्री लेकर ट्रक (क्रमांक CG 29 AC 0934) पहुँचा था। जांच में सामने आया कि यह हादसा महज एक संयोग नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी का परिणाम था। व्यस्त मार्ग होने के बावजूद ठेकेदार और चालक ने ट्रक को बैक करते समय न तो कोई सुरक्षा घेरा बनाया और न ही ट्रैफिक को रोकने के लिए किसी गाइड को तैनात किया। इसी लापरवाही के बीच वहां से गुजर रहे पल्सर सवार मनिंद्र भूषण श्याम को ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उनके सिर पर घातक चोटें आईं और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
पुलिस की जांच में उजागर हुई बड़ी चूक
सिविल लाइन पुलिस और प्रधान आरक्षक की गहन जांच व प्रत्यक्षदर्शी अमन गुप्ता के बयानों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि सुरक्षा संकेतकों (Safety Indicators) के बिना भारी वाहन का परिचालन करना सीधे तौर पर लोगों की जान जोखिम में डालना है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण सिर की गंभीर चोट को बताया गया है।
“व्यस्त सड़क पर बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के भारी वाहन से सामग्री खाली करना और उसे बैक करना गंभीर लापरवाही है। इसी आधार पर पुलिस ने ट्रक चालक और संबंधित ठेकेदार को आरोपी बनाते हुए प्राथमिकी दर्ज की है।” — पंकज पटेल, एडिशनल एसपी
कानून का कड़ा शिकंजा
पुलिस ने माना कि ठेकेदार और चालक की सामूहिक लापरवाही एक होनहार युवक की जान जाने का मुख्य कारण है। एडिशनल एसपी पंकज पटेल ने मामले में सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच को तेज कर दिया है।
