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छत्तीसगढ़ में 360 रेसिडेंट्स सोसाइटियों पर कानूनी शिकंजा: गलत एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन पर नोटिस, एक सोसायटी का पंजीयन रद्द

रायपुर। रियल एस्टेट प्रोजेक्टों की रहवासी सोसायटियों द्वारा गलत अधिनियम के तहत पंजीयन कराकर अवैध रूप से रख-रखाव शुल्क (मेंटेनेंस चार्ज) वसूलने और कॉलोनी के प्रबंधन के मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। इसी क्रम में, रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं संस्थाएं, छत्तीसगढ़ ने रायपुर की आनंद विहार रेसिडेंट्स विकास सोसायटी का पंजीयन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इसके अलावा, राज्य भर की 360 अन्य सोसायटियों को भी नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर सुधार करने का निर्देश दिया गया है।

⚠️ रख-रखाव शुल्क वसूलना उद्देश्य के विरुद्ध कार्रवाई का मुख्य कारण यह है कि ये रहवासी सोसायटियां ‘छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 यथा संशोधित 1998’ के तहत पंजीकृत थीं। रजिस्ट्रार कार्यालय के अनुसार, यह अधिनियम मुख्य रूप से सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों वाली संस्थाओं के लिए है और इसमें कॉलोनियों के दैनिक रख-रखाव (डेली मेंटेनेंस) या इससे जुड़े शुल्क लेने का कोई प्रावधान नहीं है।आनंद विहार रेसिडेंट्स विकास सोसायटी को रख-रखाव कार्य करने और शुल्क वसूली के कारण उसके पंजीकृत उद्देश्यों के विरुद्ध पाया गया। शिकायत और सुनवाई के बाद, अधिनियम की धारा-34 के तहत उसका पंजीयन निरस्त कर दिया गया है।

रियल एस्टेट सोसायटियों को ‘कोऑपरेटिव एक्ट’ के तहत पंजीयन ज़रूरी

रजिस्ट्रार फर्म एवं संस्थाएं, पद्मिनी भोई साहू ने स्पष्ट किया है कि रियल एस्टेट प्रोजेक्टों की रहवासी सोसायटियों को कॉलोनी के रख-रखाव और प्रबंधन के लिए ‘छत्तीसगढ़ कोऑपरेटिव सोसायटी अधिनियम, 1960’ के तहत ही पंजीयन कराना अनिवार्य है। यह अधिनियम ही सोसायटियों को रख-रखाव और प्रबंधन का अधिकार देता है।इसके अलावा, भू-संपदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 (RERA Act) के अनुसार, किसी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में 50 प्रतिशत से अधिक आबंटितियों द्वारा घर या प्लॉट बुक कराने के तीन माह के भीतर आवंटियों की एसोसिएशन या सहकारी सोसायटी बनाना भी अनिवार्य है।

⏳ 15 दिन में सुधार नहीं तो पंजीयन रद्द

रजिस्ट्रार पद्मिनी भोई साहू ने राज्य की कुल 360 सोसायटियों को निर्देशित किया है कि यदि उनके उद्देश्य सोसायटी अधिनियम की धारा-2 के विपरीत हैं, तो वे 15 दिनों के भीतर ऑनलाइन पोर्टल rfas.cg.nic.in पर संशोधन प्रस्ताव प्रस्तुत करें।यह चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय में सुधार नहीं करने या शिकायत मिलने पर, इन सोसायटियों का पंजीयन भी रद्द किए जाने की कार्रवाई की जाएगी।

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