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⚠️ 15 नवंबर से धान खरीदी पर संकट! समर्थन मूल्य से पहले ही कर्मचारी हड़ताल पर, 4 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन 🚨

छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए बड़ी चिंता की खबर है। प्रदेश में 15 नवंबर, 2025 से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने वाली है, लेकिन इससे ठीक पहले ही सहकारी समिति कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे पूरी खरीदी प्रक्रिया पर संकट गहरा गया है।पांच संभागों में ठप हुई तैयारीधान खरीदी से पहले ही कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से मंडियों में खरीदी की तैयारी पूरी तरह ठप हो गई है। प्रदेश के पांच प्रमुख संभागों – महासमुंद, रायपुर, बलौदाबाजार, धमतरी एवं गरियाबंद – के सैकड़ों कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी चार सूत्रीय मांगें वर्षों से लंबित हैं और सरकार ने केवल आश्वासन दिया है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।कर्मचारियों की 4 प्रमुख मांगेंजिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं, जिनके पूरा न होने तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया गया है:बकाया राशि का भुगतान: धान खरीदी वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 की संपूर्ण सुखद राशि समितियों को तुरंत प्रदान की जाए।परिवहन में तेज़ी: धान परिवहन में विलंब को रोकने के लिए प्रत्येक सप्ताह संपूर्ण धान परिवहन सुनिश्चित किया जाए।मानदेय और कमीशन में वृद्धि:धान खरीदी में शॉर्टेज, प्रोत्साहन, कमीशन, सुरक्षा व्यय को बढ़ाया जाए।मध्यप्रदेश की तर्ज पर उचित मूल्य विक्रेताओं को ₹3000 प्रतिमाह मानदेय दिया जाए।नियमितीकरण: धान खरीदी नीति 2024-25 की कंडिका 11.3.3 के तहत आउटसोर्सिंग से ऑपरेटर की नियुक्ति को समाप्त कर विभागीय रूप से उनका नियमितीकरण किया जाए।हड़ताल के साथ छुट्टियों का संयोग, अधिकारी असमंजस मेंकर्मचारियों की हड़ताल के बीच खरीदी शुरू होने की तारीख को लेकर भी संशय की स्थिति है। दरअसल, 15 नवंबर को शनिवार और 16 नवंबर को रविवार होने के कारण सरकारी अवकाश रहेगा। हड़ताल और छुट्टियों के इस संयोग ने अधिकारियों को असमंजस में डाल दिया है कि धान खरीदी वास्तव में कब से शुरू की जाए।कर्मचारियों के इस अनिश्चितकालीन आंदोलन के कारण खरीदी केंद्रों पर बारदाना (बोरे), तौल मशीन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं ठप पड़ गई हैं, जिससे सीधे तौर पर लाखों किसानों का धान बेचना प्रभावित हो सकता है। यदि सरकार और कर्मचारी संघ के बीच जल्द समझौता नहीं हुआ, तो धान खरीदी में बड़ा विलंब होने की आशंका है, जिससे किसानों की चिंताएं और बढ़ सकती हैं।

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