मोहला-मानपुर। छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर जिले में बीते 5-6 सालों से हिंसक जंगली जानवरों की लगातार आमद ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है और बस्ती में खौफ का माहौल बना दिया है। पहले हाथी, फिर तेंदुआ, और अब जिले के दक्षिण वन परिक्षेत्र में बाघ के आने की पुष्टि हो गई है।
यह मामला 1 दिसंबर को सामने आया, जब मानपुर दक्षिण वन परिक्षेत्र के औंधी तहसील क्षेत्र के ग्राम नवागढ़ में एक पालतू गाय का जंगली जानवर द्वारा शिकार किए जाने की सूचना मिली।
बाघ के पगमार्क और पुष्टि
सूचना मिलते ही क्षेत्रीय वन अमले ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया। इस दौरान वन भूमि कक्ष क्रमांक 1080 में गांव के पास बाघ के स्पष्ट पगमार्क देखे गए, और गांव से कुछ दूरी पर गाय की क्षत-विक्षत लाश भी मिली।
वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) दिनेश पटेल ने इन जानकारियों को साझा करते हुए बताया कि चूंकि तेंदुआ और चीता जैसे जानवर भारी-भरकम गाय को उठाकर ले जाने में आमतौर पर असमर्थ होते हैं, इसलिए इस बात में कोई संदेह नहीं है कि पगमार्क बाघ के ही हैं।

वन विभाग अलर्ट, लगाए गए कैमरे
डीएफओ दिनेश पटेल के मुताबिक, शिकार की लालच में बाघ के दोबारा उसी क्षेत्र में आने की प्रबल संभावना है। इसी के मद्देनजर, नवागढ़ गांव से सटे वन भूमि कक्ष क्रमांक 1080 में अलग-अलग स्थानों पर पेड़ों पर तीन कैमरे लगाए गए हैं, ताकि बाघ की गतिविधि पर नजर रखी जा सके और अन्य जानकारी जुटाई जा सके।
महाराष्ट्र से दाखिल होने की आशंका
डीएफओ पटेल ने यह भी बताया कि बाघ की आमद महाराष्ट्र सीमा के करीब ही हुई है। ऐसे में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ महाराष्ट्र की ओर से विचरण करते हुए छत्तीसगढ़ में दाखिल हुआ है। उन्होंने जल्द ही कैमरे के जरिए बाघ की और जानकारी मिलने की उम्मीद जताई है।

बस्ती में बढ़ा खौफ
मोहला-मानपुर जिले के जंगल में बीते कुछ वर्षों में हिंसक जंगली जानवरों की चहलकदमी लगातार बनी हुई है। पांच-छह साल पहले तक जंगली हाथियों का दिखना दुर्लभ था, लेकिन अब वे लगातार बस्ती में आकर जान-माल की हानि कर रहे हैं। पिछले एक-दो साल से तेंदुए का आतंक भी क्षेत्र में सामने आया है। अब हाथी और तेंदुए के बाद बाघ की आमद ने ग्रामीणों में खौफ का आलम पैदा कर दिया है। वन विभाग ने क्षेत्रवासियों को अकेले जंगल में नहीं जाने, सतर्कता बरतने और सुरक्षित रहने की सलाह दी है।

