दुर्ग। दुर्ग जिले की मोहन नगर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) के जरिए देशभर में ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों के खातों से लगभग 86,33,247/- रुपये के अवैध लेनदेन का खुलासा हुआ है।
कैसे हुआ खुलासा?
भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन संचालित भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की थी। मोहन नगर थाना क्षेत्र के स्टेशन रोड स्थित कर्नाटक बैंक की शाखा में संचालित 111 संदिग्ध बैंक खातों का तकनीकी विश्लेषण किया गया। जांच में यह कड़वा सच सामने आया कि इन खातों का इस्तेमाल देश के विभिन्न राज्यों में लोगों से ठगी गई रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था।
86 लाख से ज्यादा का अवैध ट्रांजैक्शन
पुलिस की विवेचना में पाया गया कि इन 111 खातों के माध्यम से कुल 86 लाख 33 हजार 247 रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। आरोपी भोले-भाले लोगों या जान-पहचान वालों के नाम पर खाते खुलवाकर उन्हें साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे, जिसके बदले उन्हें मोटा कमीशन मिलता था। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
पकड़े गए आरोपियों के नाम:
पुलिस ने दबिश देकर जिन 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं:
- मधु साहू (45 वर्ष)
- ज्योति गौतम (28 वर्ष)
- फरहद खान (56 वर्ष)
- भूपेश गोहिल (51 वर्ष)
- अजय कुमार उर्फ मोनू (29 वर्ष)
- मसीर आलम (27 वर्ष)
- नवीन भागवत (24 वर्ष)
- भूपेंद्र कुमार टंडन (36 वर्ष)
- संतोष बिसाई (28 वर्ष)
- हीरा सिंह (55 वर्ष)
जप्त सामग्री और कार्यवाही
पुलिस ने आरोपियों के पास से बैंक खातों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं। इस पूरी कार्यवाही में मोहन नगर थाना टीम की तकनीकी कुशलता और त्वरित एक्शन की सराहना की जा रही है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
दुर्ग पुलिस की विशेष अपील
”अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या यूपीआई पिन किसी भी अनजान व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें। चंद रुपयों के लालच में अपने खाते को ‘म्यूल अकाउंट’ बनाना आपको जेल पहुंचा सकता है। सजग रहें और किसी भी संदिग्ध वित्तीय गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।” — दुर्ग पुलिस

