दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनहीनता का एक और बड़ा मामला सामने आया है। अस्पताल के डॉक्टरों पर गर्भवती महिला की जबरन नॉर्मल डिलीवरी कराने का आरोप लगा है, जिसके बाद नवजात की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने इस पूरी घटना के लिए अस्पताल प्रशासन और ड्यूटी पर तैनात स्टाफ को जिम्मेदार ठहराया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, करिश्मा भारती नाम की गर्भवती महिला को प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि वे पिछले चार दिनों से अस्पताल में थे और महिला की स्थिति को देखते हुए बार-बार सिजेरियन (सीजर) ऑपरेशन की मांग कर रहे थे।
परिजनों का दावा है कि:
- डॉक्टरों ने उनकी मांग को अनसुना कर दिया और नॉर्मल डिलीवरी के लिए दबाव बनाया।
- 10 फरवरी की सुबह करीब 3 बजे डॉ. नेत्रा नंद और नर्स रश्मि द्वारा डिलीवरी कराई गई।
- प्रसव के दौरान नवजात की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे तुरंत ICU में शिफ्ट किया गया।
- इलाज के दौरान नवजात ने दम तोड़ दिया।
थाने में शिकायत, जांच के निर्देश
बच्चे की मौत से आक्रोशित पिता राजा राम और अन्य परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और पुलिस थाने में मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। परिजनों ने दोषी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
”हमने बार-बार कहा कि ऑपरेशन कर दीजिए, लेकिन डॉक्टरों ने जबरदस्ती की। अस्पताल की इसी लापरवाही ने मेरे बच्चे की जान ले ली।”
— राजा राम (मृतक बच्चे के पिता)
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष
इस गंभीर आरोप पर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन ने संज्ञान लिया है। उन्होंने मीडिया को बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच टीम गठित की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि रिपोर्ट में यदि कोई भी डॉक्टर या स्टाफ दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
यह पहली बार नहीं है जब दुर्ग जिला अस्पताल अपनी कार्यप्रणाली को लेकर विवादों में है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और डॉक्टरों की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

