छत्तीसगढ़ी कला जगत के जाने-माने गायक और गीतकार हिरेश सिन्हा और जितेश्वरी सिन्हा इन दिनों अपने नए वीडियो एल्बम “नई जावंव अइसन मंदिर में” को लेकर सुर्खियों में हैं। यह एल्बम केवल मनोरंजन मात्र नहीं है, बल्कि समाज में गहरा संदेश देने वाला एक वैचारिक प्रयास है।
धर्म और करुणा का संगम
इस एल्बम के माध्यम से हिरेश सिन्हा ने धर्म की एक नई और सच्ची परिभाषा प्रस्तुत करने की कोशिश की है। गीत का मूल भाव यह है कि “जब धर्म करुणा से कट जाए, तब पूजा केवल एक क्रिया रह जाती है।” लेखक का मानना है कि प्रश्न यह नहीं है कि आप किस मंदिर में जाते हैं, बल्कि प्रश्न यह है कि क्या आपके भीतर मानवता और करुणा जीवित है।
गीत के मुख्य बिंदु:
लेख में गीत के सार को कुछ पंक्तियों के माध्यम से स्पष्ट किया गया है:
- जहाँ करुणा नहीं, वहाँ पूजा व्यर्थ है।
- जहाँ दिखावा है, वहाँ धर्म नहीं टिकता।
- सच्चा सनातनी वही है जो सत्य को केवल शब्दों में नहीं, बल्कि अपने व्यवहार में उतारता है।
पाखंड और हिंसा पर प्रहार
यह प्रस्तुति धर्म के नाम पर होने वाली हिंसा, भय और पाखंड पर कड़े सवाल खड़े करती है। हिरेश सिन्हा का कहना है कि यह गीत किसी मंदिर, देवी-देवता या परंपरा के विरुद्ध नहीं है, बल्कि उस मानसिकता के खिलाफ है जो धर्म के नाम पर मानवता को कुचलने का साहस करती है।
‘अहिंसा परमो धर्म:’ का संदेश
एल्बम यह संदेश देता है कि धर्म को बचाने का एकमात्र तरीका उसमें करुणा और सत्य को बचाए रखना है। यह श्रोताओं को सोचने पर मजबूर करता है कि धार्मिक होने से पहले मनुष्य बनना अनिवार्य है। ‘सनातन धर्म की आत्मा’ कहे जाने वाले इस गीत में अहिंसा, दया और सत्य को ही सर्वोपरि बताया गया है।
सोशल मीडिया पर इस वैचारिक पहल की काफी सराहना हो रही है और इसे सामाजिक जन-जागरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

