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विशेष रिपोर्ट: जिस राजपरिवार ने महल दान कर बनाया ‘कला का मंदिर’, आज उन्हीं की समाधियां बदहाल

खैरागढ़। जिस खैरागढ़ रियासत के राजाओं ने अपनी दूरदर्शिता और उदारता से इस क्षेत्र को विश्व पटल पर ‘कला की राजधानी’ के रूप में पहचान दिलाई, आज उन्हीं राजाओं की स्मृतियां प्रशासनिक उपेक्षा और सामाजिक संवेदनहीनता की भेंट चढ़ रही हैं। खैरागढ़ के गौरवशाली इतिहास के प्रतीक राजपरिवार का समाधि स्थल आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।

कूड़े के ढेर और झाड़ियों के बीच खोया इतिहास

​कभी रियासत के मान-मर्यादा का केंद्र रहा यह समाधि स्थल वर्तमान में झाड़ियों और कटीली झाड़ियों से घिरा हुआ है। रख-रखाव के अभाव में परिसर में चारों ओर कचरे का अंबार लगा हुआ है। सबसे विचलित करने वाली बात यह है कि देखरेख और सुरक्षा न होने के कारण असामाजिक तत्वों और राहगीरों ने इस पवित्र स्थान को ‘खुला शौचालय’ बना दिया है। यह स्थिति न केवल इस ऐतिहासिक धरोहर का अपमान है, बल्कि खैरागढ़ की सांस्कृतिक गरिमा पर भी गहरा आघात है।

त्याग की विरासत पर उपेक्षा का ग्रहण

​यह वही राजपरिवार है जिसने कला और शिक्षा के प्रति अपनी अटूट निष्ठा दिखाते हुए अपने रहने का महल तक दान कर दिया, ताकि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय जैसी विश्वविख्यात संस्था की नींव रखी जा सके। एशिया के इस एकमात्र संगीत विश्वविद्यालय को जन्म देने वाले दाताओं की अंतिम विश्राम स्थली आज अव्यवस्था का पर्याय बन चुकी है।

​”यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन्होंने खैरागढ़ को नाम दिया, आज उनकी समाधि की सुरक्षा के लिए कोई सामने नहीं आ रहा। न प्रशासन सुध ले रहा है और न ही राजपरिवार की ओर से कोई सक्रियता दिख रही है।” — एक स्थानीय निवासी

प्रशासन और राजपरिवार की चुप्पी पर सवाल

​स्थानीय लोगों में इस स्थिति को लेकर गहरा रोष है। आरोप है कि:

  • नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन: ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर पूरी तरह उदासीन बना हुआ है।
  • सुरक्षा का अभाव: परिसर की घेराबंदी या नियमित सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है।
  • राजपरिवार की भूमिका: स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि राजपरिवार को भी अपनी पुश्तैनी धरोहरों के संरक्षण हेतु ठोस कदम उठाने चाहिए।

निष्कर्ष

​खैरागढ़ केवल एक शहर नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है। यदि समय रहते इन समाधि स्थलों का जीर्णोद्धार और संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां अपने उस इतिहास से कट जाएंगी जिसने उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई। प्रशासन को चाहिए कि वह इसे प्राथमिकता देते हुए स्वच्छता अभियान चलाए और इस स्थल को एक स्मारक के रूप में विकसित करे।

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