कोदवा (बेरला): ब्लॉक बेरला के ग्राम कोदवा में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन भक्ति और समाज सुधार का अनूठा संगम देखने को मिला। कथाव्यास आचार्य पंडित देवेन्द्र दुबे ने कृष्ण-सुदामा की अमर मित्रता के प्रसंग को आधुनिक भारत की ज्वलंत समस्याओं से जोड़ते हुए व्यवस्था परिवर्तन का आह्वान किया।
कृष्ण-सुदामा मिलन पर छलके श्रद्धालुओं के आंसू
कथा के दौरान जब द्वारिकाधीश कृष्ण और उनके निर्धन सखा सुदामा के मिलन का प्रसंग आया, तो पूरा पंडाल भाव-विभोर हो गया। पंडित जी ने मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि कैसे सांदीपनि आश्रम में एक राजकुमार और एक निर्धन ब्राह्मण पुत्र ने एक ही टाट-पट्टी पर बैठकर शिक्षा पाई थी। उन्होंने कहा कि सुदामा की दीन दशा देख प्रभु इतने द्रवित हुए कि बिना परात छुए अपने अश्रुओं से ही मित्र के चरण पखार दिए।
समान शिक्षा: “एक डेस्क पर बैठें अफसर और गरीब का बच्चा”
भक्ति प्रसंग को वर्तमान सामाजिक ढांचे से जोड़ते हुए पंडित दुबे ने ‘समान शिक्षा’ की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कहा:
- निजीकरण पर रोक: शिक्षा का बढ़ता व्यापार समाज में अमीर-गरीब की खाई को गहरा कर रहा है।
- सरकारी स्कूलों का कायाकल्प: सरकार को सरकारी स्कूलों का स्तर इतना ऊंचा करना चाहिए कि नेता, अधिकारी और आम जनता के बच्चे एक ही डेस्क पर बैठकर पढ़ें।
- आत्मानंद मॉडल की सराहना: उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की ‘आत्मानंद स्कूल’ पहल को सराहा और इसे और व्यापक बनाने पर जोर दिया।
स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रहार: “रेवड़ियाँ नहीं, अधिकार चाहिए”
स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों पर प्रहार करते हुए पंडित जी ने कहा कि आज मध्यम वर्ग और गरीब निजी अस्पतालों के भारी-भरकम बिलों से भयभीत है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—
”जनता को मुफ्त की साड़ियां या सामान (रेवड़ियाँ) नहीं चाहिए। यदि सरकार केवल समान शिक्षा और एम्स जैसी सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित कर दे, तो समाज खुद-ब-खुद सशक्त हो जाएगा।”
20 फरवरी को होगी भव्य पूर्णाहुति
आयोजन समिति ‘मां शारदा मानस मंडली’ के अध्यक्ष ने जानकारी दी कि इस नौ दिवसीय ज्ञान यज्ञ का समापन 20 फरवरी को होगा। समापन अवसर पर:
- गीता पूर्णाहुति
- कपिल तर्पण
- भव्य तुलसी वर्षा
आज के इस आध्यात्मिक और वैचारिक कार्यक्रम में कोदवा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

