महासमुंद। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन वर्तमान में यह कटोरा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। कवर्धा के बाद अब महासमुंद जिले के बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र से करोड़ों रुपये का धान रहस्यमयी तरीके से गायब होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस भारी कमी (शॉर्टेज) के पीछे ‘चूहों’ और ‘सीपेज’ का हवाला दे रहे हैं।
आंकड़ों का खेल: 18 हजार क्विंटल से ज्यादा का धान लापता
खरीफ सत्र 2024-25 के दौरान बागबाहरा संग्रहण केंद्र में समितियों से कुल 4,98,193 क्विंटल धान की आवक हुई थी। रिकॉर्ड के मुताबिक, केंद्र प्रभारी ने इसमें 18,433 क्विंटल की कमी दिखाई है।
- शॉर्टेज का प्रतिशत: 3.65%
- अनुमानित घाटा: लगभग 5 करोड़ 71 लाख रुपये
प्रशासन द्वारा परिवहन, हमाली और सुरक्षा पर लाखों खर्च किए जाने के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में धान का गायब होना सीधे तौर पर सरकारी खजाने और किसानों की मेहनत पर डाका है।
नियम ताक पर: सचिव के आदेशों की उड़ी धज्जियां
खाद्य विभाग की सचिव ने 12 दिसंबर 2025 को स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए थे कि धान संग्रहण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नियमों के अनुसार:
- 1% शॉर्टेज: कारण बताओ नोटिस।
- 1-2% शॉर्टेज: विभागीय जांच।
- 2% से अधिक शॉर्टेज: तत्काल निलंबन, FIR और कड़ी वसूली।
बागबाहरा में शॉर्टेज का आंकड़ा 3.65% तक पहुँच चुका है, जो निर्धारित सीमा से लगभग दुगुना है। इसके बावजूद अब तक न तो प्रभारी पर कोई गाज गिरी है और न ही FIR दर्ज की गई है।
चूहे और मौसम का बहाना, घोटाले का पुराना पैंतरा
जानकारों का मानना है कि हर साल ‘सीपेज’, कीट-पतंगे और चूहों का बहाना बनाकर करोड़ों के धान को ठिकाने लगा दिया जाता है। कागजों पर धान को खराब या कम होना दिखाकर उसे खुले बाजार में खपाने की आशंका बनी रहती है। अधिकारियों की चुप्पी और कार्रवाई में ढील इस मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है।
मुख्य बिंदु:
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| कुल आवक | 4,98,193 क्विंटल |
| दर्ज शॉर्टेज | 18,433 क्विंटल |
| शॉर्टेज प्रतिशत | 3.65% |
| आर्थिक क्षति | ₹5.71 करोड़ (लगभग) |

