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धमधा के दरगांव में महिला कमांडो का महासंगम: सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ उठी एकजुट आवाज

दरगांव (दुर्ग): दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम दरगांव में आज महिला कमांडो की मासिक बैठक का भव्य आयोजन किया गया। इस बैठक में न केवल दुर्ग, बल्कि कबीरधाम (कवर्धा) और बालोद जिलों से भी बड़ी संख्या में महिला कमांडो शामिल हुईं। कार्यक्रम का मुख्य स्वर सामाजिक चेतना, महिला सशक्तिकरण और जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव रहा।

पुलिस प्रशासन का मिला सहयोग: साइबर और कानूनी सुरक्षा पर चर्चा

​बैठक में धमधा थाना प्रभारी युवराज साहू अपने पुलिस स्टाफ के साथ विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने वर्तमान समय की चुनौतियों को देखते हुए महिलाओं को महत्वपूर्ण जानकारी दी:

  • साइबर सुरक्षा: ऑनलाइन धोखाधड़ी और सोशल मीडिया के खतरों से बचाव के तरीके।
  • यातायात नियम: सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता।
  • कानूनी अधिकार: महिलाओं से संबंधित अपराधों पर कड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी।

​थाना प्रभारी ने महिलाओं से अपील की कि वे अपने घर के पुरुषों को नशा और हिंसा से दूर रखने में प्रेरक की भूमिका निभाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

“महिलाएं समाज परिवर्तन की धुरी”: शमशाद बेगम

​कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाते हुए शमशाद बेगम ने उपस्थित महिलाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जागरूक और संगठित महिलाएं ही एक सशक्त समाज की नींव रख सकती हैं। उन्होंने महिला कमांडो को निडर होकर सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया।

एक सोच महिला कमांडो: संकल्प और उद्देश्य

​बैठक के दौरान ‘एक सोच महिला कमांडो’ की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की गई। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य है:

  1. सामाजिक बुराइयों का अंत: नशाखोरी, बाल विवाह, टोनही प्रथा और दहेज जैसी कुप्रथाओं पर पूर्ण अंकुश लगाना।
  2. सरकारी योजनाओं का लाभ: शासन की जन कल्याणकारी योजनाओं को पात्र व्यक्तियों तक पहुँचाना।
  3. शिक्षण और समानता: महिला एवं बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना और कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपराधों के खिलाफ संघर्ष करना।

स्वयं से बदलाव की शुरुआत

​वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि समाज में व्याप्त बुराइयों के लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं, इसलिए समाधान भी हमें ही ढूंढना होगा। उन्होंने कहा कि महिलाएं ‘शक्ति स्वरूपा’ हैं; यदि वे एक बार संकल्प ले लें, तो समाज की तस्वीर बदल सकती हैं।

निष्कर्ष: यह बैठक इस स्पष्ट संदेश के साथ संपन्न हुई कि महिला कमांडो केवल एक समूह नहीं, बल्कि गांव-गांव में जागरूकता फैलाने वाली एक क्रांति है, जो सुरक्षित और नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।

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