दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस ने नशे के काले कारोबार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। पुलगांव थाना क्षेत्र के ग्राम समोदा और झेंझरी के बीच लगभग 5.62 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से उगाई गई अफीम की फसल को जब्त किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की अनुमानित कीमत करीब ₹8 करोड़ बताई जा रही है।

मक्के की फसल के बीच छिपा था ‘काला सोना’
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि जेवरा-सिरसा चौकी के पास कुछ खेतों में संदिग्ध पौधे उगाए जा रहे हैं। जब पुलिस, NCB और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर दबिश दी, तो वे दंग रह गए। आरोपियों ने चालाकी दिखाते हुए मक्के और भुट्टे की ऊंची फसलों के बीच अफीम के पौधे लगा रखे थे ताकि किसी को शक न हो।

बड़ी टीम ने मारा छापा
कलेक्टर के निर्देश पर राजस्व विभाग (SDM और तहसीलदार) के साथ पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), FSL और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। रिकॉर्ड के अनुसार, कुल 10 एकड़ से अधिक की भूमि की जांच की गई, जिसमें से साढ़े पांच एकड़ से ज्यादा हिस्से में अफीम लहलहा रही थी।

इन आरोपियों पर कसा शिकंजा
मामले में पुलिस ने राजस्थान और स्थानीय कनेक्शन का खुलासा किया है। गिरफ्तार और संदेही आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:
- विनायक ताम्रकार (58 वर्ष): निवासी तेमरापारा, दुर्ग।
- विकास बिश्नोई (27 वर्ष): निवासी जोधपुर, राजस्थान (हाल मुकाम समोदा)।
- मनीष ठाकुर (45 वर्ष): निवासी दुर्ग।
जांच में पता चला है कि अफीम की खेती के तकनीकी ज्ञान के लिए राजस्थान से विशेष रूप से लोगों को बुलाकर काम कराया जा रहा था।
“यह एक अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा हो सकता है। हमने NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और मजिस्ट्रेट के सामने सैंपलिंग की प्रक्रिया पूरी की गई है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है।”
— दुर्ग पुलिस प्रशासन
प्रमुख बिंदु:
- जब्ती: 05 एकड़ 62 डिसमिल में लगी अफीम।
- कीमत: लगभग ₹8 करोड़।
- कार्रवाई में शामिल: ASP सुखनंदन राठौर, मणिशंकर चन्द्रा, CSP हर्षित मेहर सहित राजस्व और NCB की टीम।
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे नशे के इस अवैध कारोबार के खिलाफ जागरूक रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी थाने में दें।

