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राजनांदगांव ने रचा इतिहास: जल संरक्षण में दो राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले ने राष्ट्रीय जल मिशन कार्यक्रम के तहत जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए एक साथ दो प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए हैं। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के कर कमलों से ये सम्मान जिला प्रशासन को प्रदान किए गए।

🥇 ईस्ट ज़ोन का ‘बेस्ट जिला’ घोषित

राजनांदगांव जिले को राष्ट्रीय जल मिशन प्रतियोगिता के विभिन्न चरणों के गहन निरीक्षण, पर्यवेक्षण और मूल्यांकन के बाद ईस्ट जोन का सर्वश्रेष्ठ जिला (Best District) चुना गया है। यह पुरस्कार जिले के कलेक्टर जितेंद्र यादव और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुरूचि सिंह ने ग्रहण किया।

💰 जनभागीदारी के लिए ₹2 करोड़ का प्रोत्साहन पुरस्कार

इसी समारोह में, जल संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए किए गए सराहनीय प्रयासों के लिए राजनांदगांव जिले को 2 करोड़ रुपये का ‘जल संचय से जनभागीदारी प्रोत्साहन पुरस्कार’ भी प्रदान किया गया।यह महत्वपूर्ण उपलब्धि वर्ष 2022 में शुरू किए गए ‘मिशन जल रक्षा’ के सफल क्रियान्वयन का परिणाम है। इस मिशन में जिले के नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिलाओं, उद्योगपतियों और जनप्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिससे भू-जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आया।

🌊 गिरते जल स्तर को रोकने के लिए तकनीकी नवाचार

सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (CGWB) की रिपोर्ट के अनुसार, जिले के तीन विकासखंड भू-जल स्तर के मामले में ‘सेमी-क्रिटिकल जोन’ में हैं। जिले में 85% भू-जल का उपयोग सिंचाई में होता है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, जिले ने व्यापक रणनीति के तहत ‘जल शक्ति अभियान – कैच द रेन मोर गांव मोर पानी’ के अंतर्गत ‘मिशन जल रक्षा – नारी शक्ति से जल शक्ति’ की शुरुआत की।जिले में किए गए प्रमुख तकनीकी नवाचार:रिचार्ज सॉफ्ट बोरवेल: असफल बोरवेल में सेंड फिल्टर तकनीक और रिचार्ज सॉफ्ट बोरवेल द्वारा भू-जल रिचार्ज का सफल प्रयास।इंजेक्शन वेल: परकुलेशन टैंक में इंजेक्शन वेल तैयार कर वर्षाजल को सीधे वाटर टेबल से जोड़ा गया।पहाड़ी क्षेत्रों में संरचनाएं: पहाड़ी क्षेत्रों में रिचार्ज संरचनाओं और लो-लाइन क्षेत्रों में जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण।

GIS आधारित योजना: संरचनाओं की मरम्मत, संधारण और जीआईएस-आधारित योजना निर्माण में सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड, रायपुर का तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।इन कार्यों में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की भागीदारी दर्ज की गई, जिसने ‘नारी शक्ति से जल शक्ति’ के मिशन को सार्थक बनाया।

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