बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से आस्था और विश्वास की एक अनोखी खबर सामने आई है। ग्राम राखी जोबा के रहने वाले एक कबीर पंथी अनुयायी गणेश साहू ने अपने खेत के सूखे बोरवेल में दोबारा पानी की उम्मीद लेकर जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। उनकी मांग किसी आर्थिक सहायता की नहीं, बल्कि अपने धर्मगुरु को अपने खेत तक बुलाने की है।
2003 की वो ‘चौका आरती’ और किसान का विश्वास
गणेश साहू का विश्वास उस घटना पर टिका है जो साल 2003 में हुई थी। तब उन्होंने अपने खेत में बोर कराया था और कबीर पंथ के गुरु गोसाईं भानुप्रताप के हाथों वहां ‘चौका आरती’ कराई गई थी। गणेश का दावा है कि उस अनुष्ठान के बाद से बोरवेल में पानी की कभी कमी नहीं हुई और फसलें लहलहाती रहीं।
गिरते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता
बीते तीन वर्षों में बेमेतरा जिले में भूजल स्तर (Groundwater Level) में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस प्राकृतिक बदलाव का असर गणेश साहू के खेत पर भी पड़ा और उनके बोरवेल से पानी आना कम हो गया है। एक श्रद्धालु होने के नाते, उनका मानना है कि यदि कबीर पंथ के वर्तमान गुरु उनके खेत में आकर पुनः ‘चौका आरती’ कर दें, तो पानी का संकट दूर हो जाएगा।

दामाखेड़ा से निराशा, कलेक्टर से उम्मीद
गणेश साहू अपनी इस अर्जी को लेकर कबीर पंथ के प्रसिद्ध तीर्थ दामाखेड़ा भी गए थे। उनका कहना है कि वहां सेवादारों द्वारा गुरु गोसाईं से मिलने न दिए जाने के कारण वे काफी आहत हुए। अंततः, उन्होंने हार मानकर बेमेतरा कलेक्टर के ‘जनदर्शन’ में आवेदन लगाया है।
आवेदन का मुख्य अंश:
किसान ने प्रशासन से आग्रह किया है कि कबीर पंथ गुरु उदित मुनि नाम साहेब को उनके ग्राम राखी जोबा स्थित खेत में भेजने की पहल की जाए, ताकि वहां चौका आरती संपन्न हो सके।
प्रशासन के सामने अनोखी चुनौती
अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में है। क्या प्रशासन एक नागरिक की व्यक्तिगत आस्था का सम्मान करते हुए धर्मगुरु को आमंत्रित करने की दिशा में कोई कदम उठाएगा? या फिर गिरते जलस्तर के इस दौर में प्रकृति अपनी चाल खुद तय करेगी?
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि गणेश साहू की आस्था बोरवेल में फिर से पानी लौटा पाएगी या नहीं। यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
बाईट: गणेश साहू (कबीर पंथी अनुयायी, ग्राम राखी जोबा)

