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छत्तीसगढ़ के जंगलों में फिर गूंजेगी बाघों की दहाड़! 6 बाघों को लाने की तैयारी अंतिम चरण में

मध्य प्रदेश के कान्हा और बांधवगढ़ से होगी शिफ्टिंग; संरक्षण के लिए 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था

रायपुर। छत्तीसगढ़ के दो प्रमुख टाइगर रिजर्व, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR), एक बार फिर बाघों की दहाड़ से गूंजने की तैयारी में हैं। राज्य में बाघों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश से कुल छह बाघों को स्थानांतरित करने की योजना अब अंतिम चरण में पहुँच गई है।

​वन विभाग की टीमें जल्द ही मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कान्हा और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए रवाना होंगी। दोनों राज्यों के वन विभागों और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) से औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद इस प्रक्रिया को तेज़ कर दिया गया है।

कहां से आएंगे कितने बाघ?

​मिली जानकारी के अनुसार, इस स्थानांतरण योजना के तहत:

  • कान्हा टाइगर रिजर्व से एक नर और दो मादा बाघों को उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) में शिफ्ट किया जाएगा।
  • बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से तीन बाघिनों को तमोर पिंगला के विशाल वनों में छोड़ा जाएगा।

संरक्षण के लिए विशेष इंतज़ाम

​बाघों के सुरक्षित और सहज रूप से नए वातावरण में बसने को प्राथमिकता देते हुए वन विभाग ने व्यापक प्रबंधन किए हैं:

  • 24 घंटे निगरानी: सभी स्थानांतरित बाघों को कॉलर आईडी लगाई जाएगी, जिससे उनकी गतिविधियों और मूवमेंट पर वास्तविक समय में 24 घंटे निगरानी रखी जा सकेगी।
  • पर्यावास विकास: जंगलों में शिकार एवं जल स्रोतों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए घासभूमि विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
  • सुरक्षा व्यवस्था: वन क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के साथ ही शिकारी गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखने के लिए स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट तैनात की जाएगी।

जैव विविधता को मिलेगी नई ऊर्जा

​वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस स्थानांतरण का मुख्य मकसद केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करना भी है।

  • गुरु घासीदास-तमोर पिंगला को विशाल वन क्षेत्र, अनुकूल भू-भाग और पर्याप्त शिकार उपलब्ध होने के कारण बाघों के दीर्घकालिक निवास के लिए उपयुक्त माना जाता है।
  • ​अधिकारियों ने विश्वास जताया कि यदि योजना सफल रही तो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ मध्य भारत में बाघ संरक्षण के सबसे सफल मॉडल स्टेट के रूप में उभर सकता है।

ग्रामीणों के लिए जागरूकता अभियान

​बाघों के आगमन को लेकर स्थानीय वनकर्मियों के साथ-साथ ग्रामीणों में भी उत्साह और जिज्ञासा है। विभाग द्वारा आसपास के गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत ग्रामीणों को वन्यप्राणियों से दूरी बनाए रखने, सूचना तंत्र को मजबूत करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचाव के उपायों के बारे में बताया जा रहा है।

बार नवापारा में भी बाघ बसाने की तैयारी

​वर्तमान में छत्तीसगढ़ में इंद्रावती, उदंती-सीतानदी, अचानकमार और तमोर-पिंगला सहित चार टाइगर रिजर्व हैं। इसके अतिरिक्त, बार नवापारा अभ्यारण्य में भी बाघों को बसाने के लिए वन विभाग तैयारी कर रहा है।

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