बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ भारत स्काउट्स एंड गाइड्स में अध्यक्ष पद को लेकर मचा घमासान अब कानूनी लड़ाई में बदल चुका है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। जस्टिस एन.के. व्यास की सिंगल बेंच ने इस मामले में राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
कोर्ट की कार्यवाही और अगली तारीख
मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने शासन को अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। इस हाई-प्रोफाइल विवाद की अगली सुनवाई अब 12 फरवरी को निर्धारित की गई है। तब तक शासन को यह स्पष्ट करना होगा कि अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया किन नियमों के तहत की गई।
विवाद की जड़: बालोद जंबूरी और स्थान परिवर्तन
इस पूरे विवाद के केंद्र में बालोद में आयोजित हो रही राष्ट्रीय जंबूरी है। घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहा:
- स्थान परिवर्तन: पहले इस भव्य आयोजन के लिए नया रायपुर का चयन किया गया था, जिसे अचानक बदलकर बालोद कर दिया गया।
- वित्तीय अनियमितता के आरोप: सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने आयोजन में वित्तीय गड़बड़ियों की आशंका जताते हुए जंबूरी को रद्द करने की घोषणा की थी।
- आदेश का विरोध: स्काउट-गाइड के राज्य आयुक्त ने अग्रवाल की घोषणा को भ्रामक बताते हुए आयोजन जारी रखा। इसके बाद ही अग्रवाल को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसे उन्होंने ‘असंवैधानिक’ करार दिया है।
वर्तमान स्थिति
जहाँ एक ओर कानूनी जंग जारी है, वहीं दूसरी ओर बालोद में राष्ट्रीय जंबूरी अपने समापन चरण पर है। अग्रवाल पक्ष का तर्क है कि बिना उचित प्रक्रिया और संवैधानिक आधार के उन्हें निर्वाचित पद से हटाया गया है।
मुख्य बिंदु:
- याचिकाकर्ता: सांसद बृजमोहन अग्रवाल।
- न्यायालय: जस्टिस एन.के. व्यास की सिंगल बेंच, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट।
- प्रमुख विवाद: अध्यक्ष पद से निष्कासन और जंबूरी आयोजन में स्थान परिवर्तन।
- अगली सुनवाई: 12 फरवरी, 2026।

