कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के बहुचर्चित सत्यमदास मानिकपुरी हत्याकांड की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। लगभग दो महीने (56 दिन) तक चली गहन जांच, 50 हजार मोबाइल नंबरों के विश्लेषण और 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की खाक छानने के बाद पुलिस एक विधि से संघर्षरत नाबालिग बालक तक पहुँचने में सफल रही। इस अंधे कत्ल के पीछे ब्लैकमेलिंग और अप्राकृतिक संबंधों की चौंकाने वाली कहानी सामने आई है।
क्या था मामला?
बीती 17 जनवरी 2026 को कवर्धा के लालपुर नर्सरी के पास सड़क पर एक युवक का लहूलुहान शव मिला था। मृतक की पहचान 27 वर्षीय सत्यमदास मानिकपुरी के रूप में हुई, जो पेशे से डांस टीचर था। उसकी गला रेतकर बेरहमी से हत्या की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी राजनांदगांव रेंज बालाजी राव और एसपी धर्मेंद्र सिंह के निर्देशन में विशेष टीमों का गठन किया गया था।
एथिकल हैकिंग और तकनीकी जांच से मिला सुराग
पुलिस ने इस अंधे कत्ल को सुलझाने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया। जांच के दौरान:
- 50,000 मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया गया।
- 500+ सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले गए।
- एथिकल हैकिंग के जरिए मृतक के इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया अकाउंट्स की पड़ताल की गई।
- संदिग्धों और परिचितों सहित 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई।
ब्लैकमेलिंग बनी हत्या की वजह
पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों से पता चला कि मृतक सत्यमदास और आरोपी नाबालिग के बीच पिछले 3 महीनों से जान-पहचान थी। दोनों के बीच अप्राकृतिक संबंध थे। आरोपी का आरोप है कि मृतक उसे इन संबंधों को लेकर लगातार ब्लैकमेल कर रहा था और दोबारा संबंध बनाने का दबाव बना रहा था। इसी तंग आकर नाबालिग ने हत्या की साजिश रची।
मोबाइल सर्च हिस्ट्री ने खोला राज
पकड़े गए नाबालिग के मोबाइल की जांच में पुलिस को हैरान करने वाली जानकारियां मिलीं। आरोपी इंटरनेट पर अपराध छुपाने के तरीके सर्च करता था। उसकी सर्च हिस्ट्री में शामिल था:
- अपराध के बाद कैसे बचें और मोबाइल ट्रैकिंग से कैसे बचें?
- साइकोलॉजिकल थ्रिलर और डर का पैटर्न।
- साउंड प्रूफ कमरे और मानसिक थकान से जुड़ी जानकारियां।
साक्ष्य बरामद, आरोपी अभिरक्षा में
पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त स्कूटी, खून से सने कपड़े और नदी में फेंका गया मृतक का मोबाइल बरामद कर लिया है। घटना में प्रयुक्त चाकू पहले ही जब्त किया जा चुका था। पुलिस ने घटना का सीन रिक्रिएट भी कराया है।
इनाम की घोषणा: इस गुत्थी को सुलझाने के लिए एसपी कबीरधाम ने 10,000 रुपये के इनाम की घोषणा भी की थी। मामले को सुलझाने में कोतवाली प्रभारी योगेश कश्यप, साइबर सेल और जिले के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम का विशेष योगदान रहा।

