विकासखंड साजा के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत खैरी के आश्रित ग्राम लोलेसरा में इस वक्त पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। नौतपा और भीषण गर्मी के इस दौर में जहां एक-एक बूंद पानी की कीमत है, वहीं ग्राम लोलेसरा का मुख्य तालाब पूरी तरह से सूख चुका है। तालाब के पास स्थित बोर (नलकूप) पिछले लंबे समय से खराब पड़ा है, जिसे सुधारने में स्थानीय प्रशासन और ग्राम सरपंच पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।
सरपंच का सिर्फ आश्वासन, काम ‘शून्य’
ग्रामीणों का आरोप है कि इस विकट समस्या को लेकर वे कई बार ग्राम सरपंच के चक्कर काट चुके हैं। जब भी सरपंच से बोर बनवाने और तालाब में पानी भरवाने की गुहार लगाई जाती है, तो सरपंच महोदय हर बार “हाँ, बनवा दूँगा” कहकर बात को टाल देते हैं। सरपंच की इस टालमटोल नीति और उदासीनता के कारण आज पूरा गांव पानी की किल्लत झेलने को मजबूर है।
“हम लोग कई बार सरपंच के पास जा चुके हैं। हर बार सिर्फ ‘हव-हव’ (हाँ-हाँ) बोलकर बात को आगे बढ़ा दिया जाता है, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं दिख रहा। गर्मी अपने चरम पर है, अगर जल्दी बोर नहीं सुधरा तो स्थिति और बदतर हो जाएगी।”
— पीड़ित ग्रामीण, लोलेसरा
पशु-पक्षियों पर मंडराया संकट
तालाब सूखने और बोर खराब होने का सबसे बुरा असर गांव के मवेशियों और मूक पशु-पक्षियों पर पड़ रहा है। भीषण गर्मी में तपते इस मौसम में बेजुबान जानवरों को पीने का पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। ग्रामीण किसी तरह अपने इस्तेमाल के लिए पानी का जुगाड़ कर रहे हैं, लेकिन तालाब सूखा होने के कारण मवेशी पानी की तलाश में मीलों भटकने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
गांव के आक्रोशित ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- तत्काल प्रभाव से खराब पड़े बोर को सुधारा जाए।
- सूख चुके तालाब में टैंकर या वैकल्पिक माध्यम से पानी भरने की व्यवस्था की जाए ताकि बेजुबान पशु-पक्षियों की जान बचाई जा सके।
निष्कर्ष:
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरपंच और संबंधित विभाग ने इस गंभीर समस्या पर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे उच्च अधिकारियों से इसकी शिकायत करने और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया स्थानीय प्रशासन और सरपंच इस खबर के बाद जागते हैं या ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए ऐसे ही तरसते रहेंगे।
