बेमेतरा (देवकर):-छत्तीसगढ़ के शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान कक्षा 7वीं के गणित पाठ्यक्रम में आई तकनीकी विसंगति को लेकर पालकों और शिक्षाविदों में गहरी चिंता देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत अन्य विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है, लेकिन गणित विषय को पुराना रखे जाने से छात्रों के भविष्य पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए सजग पालक मणि लाल साहू ने जिला बेमेतरा के संपादकों और ब्यूरो प्रमुखों को पत्र प्रेषित कर इस नीतिगत विसंगति पर तत्काल ध्यान आकर्षित किया है।
प्रमुख चिंताएं और मुख्य बिंदु:
- गणित पाठ्यक्रम का अपरिवर्तित रहना: स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा इस सत्र 2026-27 में कक्षा 7वीं के अन्य सभी विषयों का पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बदल दिया गया है, परंतु महत्वपूर्ण विषय ‘गणित’ को पूर्ववर्ती SCERT के पुराने पाठ्यक्रम पर ही रखा गया है।
- लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर: यह समस्या प्रदेश के उन लाखों बच्चों से जुड़ी है, जिन्होंने पिछले सत्र 2025-26 में कक्षा 6वीं में नए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम के तहत NCERT (गणित प्रकाश) की आधुनिक पद्धति से अध्ययन किया था।
- लर्निंग गैप (Academic Gap) का खतरा: कक्षा 6वीं में एडवांस NCERT गणित पढ़ने के बाद, इस साल 7वीं में अचानक पुरानी पद्धति (SCERT) से पढ़ाई करना और फिर अगले वर्ष कक्षा 8वीं में पुनः NCERT पाठ्यक्रम पर लौटना—इस उतार-चढ़ाव से छात्रों की शिक्षा में बड़ा व्यवधान और लर्निंग गैप उत्पन्न हो सकता है।
पालकों की मुख्य मांगें:
- नीतिगत स्पष्टीकरण: पालकों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग यह स्पष्ट करे कि जब अन्य सभी विषयों का पाठ्यक्रम बदला जा चुका है, तो केवल ‘गणित’ विषय को इस सत्र में अपरिवर्तित रखने के पीछे क्या कारण या नीति है।
- शैक्षणिक नुकसान से बचाव: इस तकनीकी विसंगति के कारण बच्चों की पठन-पाठन प्रक्रिया पर पड़ने वाले विपरीत प्रभावों को दूर करने के लिए विभाग ठोस कदम उठाए।
अनुरोध:
पत्र के माध्यम से छात्रों के उज्ज्वल भविष्य और शैक्षणिक स्तर को ध्यान में रखते हुए इस नीतिगत विषय को प्रमुखता से प्रकाशित करने तथा जिम्मेदार शिक्षा अधिकारियों से इस पर अकादमिक स्पष्टीकरण प्राप्त करने का आग्रह किया गया है।
