धमधा (दुर्ग, छ.ग.): आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज, तहसील धमधा द्वारा मंगलवार, 30 जून 2026 को वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर त्रिमूर्ति महामाया बुढ़ादेव बुढ़ीमाई प्रांगण में एक दिवसीय भव्य सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र भर से आए हजारों समाजजनों ने सहभागिता निभाई।
शोभायात्रा और पारंपरिक अनुष्ठान
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 09 बजे हुआ। सुबह 10 बजे बुढ़ादेव की पूजा-अर्चना के साथ एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते हुए समाज के महिला-पुरुषों ने रानी दुर्गावती के शौर्य और बलिदान को नमन किया। यह शोभायात्रा क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र रही।

समाज की एकजुटता और विकास पर जोर
दोपहर 2 बजे से मुख्य कार्यक्रम और अतिथि स्वागत का दौर चला। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ध्रुव गोंड़ समाज तहसील धमधा के अध्यक्ष पुरानिक नेताम ने कहा कि, “वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान हमारी आदिवासी अस्मिता और स्वाभिमान का प्रतीक है। हमें उनके आदर्शों को अपनाते हुए समाज की उन्नति के लिए शिक्षा और संगठन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।”
मुख्य अतिथि श्रीमती श्वेता प्रशांत अग्रवाल (अध्यक्ष, नगर पंचायत धमधा) ने कहा कि नगर पंचायत आदिवासी समाज के विकास और उनके उत्थान के लिए हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। विशेष अतिथि के रूप में बृजेन्द्र दानी (उपाध्यक्ष, नगर पंचायत) और युवा भाजपा नेता पीयूष ताम्रकार उपस्थित रहे।
महिला शक्ति की सक्रिय भूमिका
कार्यक्रम में महिला प्रकोष्ठ की सक्रिय भागीदारी सराहनीय रही। राजेश्वरी ठाकुर, रेखा ठाकुर, अनिता ठाकुर, संगीता ठाकुर, नीतू ठाकुर और गोदावरी ठाकुर सहित अनेक महिलाओं ने कार्यक्रम का कुशल संचालन संभाला। इसके साथ ही कुवरिया बाई मरकाम और ऐन बाई मरकाम ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
क्षेत्रभर से जुटे हजारों समाजजन
इस सम्मेलन में मुड़ादार बनाहारपुरी, तुमाकला, रगबंधी, बचेड़ी, गोता मारटरा, ढौर, हिंगनो, नंदकट्ठी, पगबंधी, रहटादाह, बोरी, भेड़सरा, छुईहा नवागांव, शिवकोकड़ी समेत दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का सफल संचालन महेश मंडावी ने किया। समाज के पदाधिकारियों में मनबोध मंडावी, द्वारिका खुसरो, संतोष छेदहा और गुलाब सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही।
आयोजकों द्वारा समाज के सहयोग के लिए “एक किलो चावल व 100 रुपये” के योगदान का आग्रह किया गया था, जिसे समाजजनों ने सहर्ष स्वीकार किया। अंततः, वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान को याद करते हुए यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

