जगदलपुर/गढ़चिरौली: छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा पर सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद की विचारधारा और उसके प्रभाव को जड़ से मिटाने की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। गढ़चिरौली जिले में चलाए गए एक संयुक्त ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने नक्सलियों द्वारा बनाए गए 44 स्मारकों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
संयुक्त ऑपरेशन की बड़ी कार्रवाई
यह कार्रवाई किसी एक इकाई की नहीं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के आपसी समन्वय का परिणाम थी। इस अभियान में निम्नलिखित बल शामिल थे:
- सी-60 (C-60): महाराष्ट्र पुलिस की विशेष नक्सल विरोधी इकाई।
- CRPF: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल।
- जिला पुलिस: स्थानीय पुलिस बल का सक्रिय सहयोग।
महिमामंडन पर रोक लगाने की कोशिश
अधिकारियों के अनुसार, ये स्मारक वर्षों से नक्सली प्रचार के केंद्र बने हुए थे। इनके जरिए नक्सली अपनी विचारधारा का प्रसार करते थे और स्थानीय युवाओं को गुमराह कर संगठन में शामिल होने के लिए उकसाते थे। इन ढांचों को गिराने का मुख्य उद्देश्य नक्सलवाद के महिमामंडन (Glorification) पर अंकुश लगाना है।
”यह अभियान पूरी तरह से सुनियोजित था। क्षेत्रीय सुरक्षा आकलन के बाद ही इसे अंजाम दिया गया है ताकि इलाके में प्रशासनिक पकड़ मजबूत हो और विकास की राह में आने वाले रोड़ों को हटाया जा सके।” — सुरक्षा अधिकारी
शांति और विकास की ओर बढ़ते कदम
पिछले कुछ समय से महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी आई है। इन 44 स्मारकों के ध्वस्तीकरण से यह स्पष्ट संदेश गया है कि क्षेत्र में अब केवल शासन और कानून का ही प्रभाव रहेगा। स्थानीय ग्रामीणों के बीच सुरक्षा का भाव जगाने के लिए सुरक्षा बल लगातार गश्त और सामुदायिक पुलिसिंग पर जोर दे रहे हैं।
