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नगर पंचायत धमधा की “चमचमाती संवेदनहीनता”: जनता की गलियां डूबीं गंदगी में, पर जेसीबी पहुंची प्राइवेट हॉस्पिटल की नाली साफ करने!

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के धमधा नगर पंचायत की कार्यशैली अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। जहां एक ओर आम नागरिक बदबूदार नालियों और भयावह जलजमाव से त्रस्त हैं, वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत की जेसीबी मशीन एक निजी (प्राइवेट) अस्पताल की नाली साफ करने में जुटी नजर आई। नगर के इस दृश्य ने जनता के आक्रोश को भड़का दिया है, और लोग सीधे तौर पर सरकारी संसाधनों के निजी इस्तेमाल पर सवाल उठा रहे हैं।💰 जनता का सवाल: “हमारे टैक्स से अस्पताल की सेवा क्यों?”नगर पंचायत की इस ‘स्पेशल ट्रीटमेंट’ वाली कार्यशैली को देखकर लोग अब खुलकर अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है:”जब जनता की गलियों में सफाई करने कोई नहीं आता, तो अस्पताल के आगे सरकारी मशीनें क्यों लगाई जा रही हैं?””धमधा में सरकारी संसाधन अब निजी लोगों की चौखट पर झुक रहे हैं!”नगर के रहवासी आगबबूला हैं। उनका कहना है कि नगर पंचायत की जेसीबी, सफाई कर्मी और फंड सबका इस्तेमाल जनता के लिए होना चाहिए, न कि निजी संस्थाओं के लिए।नागरिकों का सीधा आरोप है कि जिन वार्डों में महीनों से नाली साफ नहीं हुई, वहां गंदगी का ढेर लगा है, लेकिन अस्पताल की नाली को “स्पेशल ट्रीटमेंट” दिया जा रहा है।🎯 सीएमओ एन. आर. रत्नेश पर जनता का सीधा निशानानगर पंचायत के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) एन.आर. रत्नेश पर नागरिकों का सीधा आरोप है कि उन्होंने नगर की जमीनी स्थिति को पूरी तरह नजरअंदाज कर रखा है।लोगों का कहना है कि सफाई व्यवस्था चरमरा चुकी है, नालियां जाम हैं, पर अधिकारी “फोटो खिंचवाओ, पोस्ट लगाओ” स्टाइल में काम कर रहे हैं।जनता ने तंज कसते हुए कहा, “नगर पंचायत धमधा: जहां सफाई ‘पोस्ट’ में होती है, जमीन पर नहीं!”उनका मानना है कि सीएमओ का रवैया इतना सुस्त है कि अब नगर में सफाई से ज्यादा सियासी सफाई हो रही है।📸 सफाई के नाम पर सिर्फ ‘फोटोशूट’ और खानापूर्तिस्थानीय लोगों के अनुसार, नगर में सफाई अभियान अब एक मज़ाक बन चुका है।हर शिकायत के बाद केवल दो-चार फोटो खिंचवाकर सफाई की खानापूर्ति कर दी जाती है।ज़मीनी हालात जस के तस हैं, और गंदगी का साम्राज्य बरकरार है।⚔️ सच्चाई दिखाने पर पत्रकारों पर सोशल मीडिया हमलाजब पत्रकारों ने नगर की चरमराती गंदगी को उजागर किया, तो कुछ कथित नेता और नगर पंचायत समर्थक सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए।उन्होंने पत्रकारों को “फर्जी खबर फैलाने वाला” कहकर फेसबुक पर बदनाम करने की कोशिश की।पत्रकारों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि “सच्चाई लिखना अपराध नहीं, लेकिन सच्चाई छिपाने की कोशिश गुनाह है।”जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या नगर पंचायत की मशीनें सिर्फ सत्य को दफनाने के लिए हैं, या वाकई नगर की सफाई के लिए?जनता की मांग है कि नगर पंचायत तत्काल प्रभाव से अपनी प्राथमिकताओं को बदले, सरकारी संसाधनों का निजी इस्तेमाल बंद करे और आम नागरिकों के वार्डों में सफाई व्यवस्था को बहाल करे।

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