रायपुर: ताड़मेटला, झीरम घाटी और सैकड़ों अन्य हत्याओं के आरोपी कुख्यात माओवादी कमांडर मांडवी हिड़मा के सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे जाने के बाद सोशल मीडिया पर एक तीखा विवाद छिड़ गया है। बटालियन नंबर-1 और माओवादी केंद्रीय कमेटी में सक्रिय रहे हिड़मा की मौत को कई लोग सोशल मीडिया पर खुले तौर पर समर्थन दे रहे हैं और मुठभेड़ को ‘फर्जी’ करार देने की कोशिश कर रहे हैं।
🔥 खुले समर्थन पर पुलिस सख्त
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में माओवादी संगठन के समर्थन में लगाए गए नारों से यह साफ हो गया है कि नक्सली विचारधारा से सहानुभूति रखने वाले तत्व अब खुलकर सामने आ गए हैं।
इस संबंध में, बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) ने एक सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
- ”किसी विचारधारा का समर्थन अलग बात है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति हिंसा को बढ़ावा देने या उसे उचित ठहराने में शामिल पाया जाता है, तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”
⚠️ आत्मसमर्पण का अवसर ठुकराया
आईजी ने बताया कि मांडवी हिड़मा के पास अपने कई वरिष्ठ साथियों की तरह आत्मसमर्पण का पूरा अवसर था। सरकार ने भी उसे सुरक्षित समर्पण का अवसर देने की कोशिश की थी, लेकिन उसने लगातार हिंसा का रास्ता ही चुना।
🚨 सोशल मीडिया पर कड़ी नजर
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि समाज में हिंसक गतिविधियों के लिए कोई स्वीकार्यता नहीं है और अपराध करने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाती है।
आईजी ने कहा कि हिड़मा के समर्थन में सोशल मीडिया पर आ रही सभी प्रतिक्रियाओं पर पुलिस की लगातार निगरानी है। यदि कोई भी व्यक्ति माओवादी संगठन के लिए प्रचार करता या हिंसा का समर्थन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

