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छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस पर नेमी राम रजक की ‘हमर गोठ बात’ ने मोहा मन

हमर गोठ बात कविता

मैना सुवा के गुरतुर‌ बोली कस, हावय मयारू छत्तीसगढ़ी बोली।अमरइया के कोइली कस कुहके, मीठ मीठ इंहां के हंसी- ठिठोली । बड़े फजर ले राम नाम संग, पहिली होथे बात गोठ । मया-पिरीत के बंधना म बंधाये, छत्तीसगढ़ी भाखा हावय सबले पोठ । बड़ मनभावन निश्छल पावन छत्तीसगढ़ी बानी हे । झूठ लबारी अंतस म नइ राहय,सादा-सादा इंहा के जिनगानी हे। राजभाखा हमर पुरखा के थाती ये, येला जतन करके राखे ल परही । पढ़ई-लिखई सरकारी काम कारज होही, तभे छत्तीसगढ़िया के मान सनमान बड़ही ।।

मैना सुवा की गुरतुर बोली और मया-पिरीत के महत्व को बताती सुंदर कविता

बेमेतरा/साजा (विशेष संवाददाता)। 28 नवम्बर को मनाए गए छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस के अवसर पर, शासकीय प्राथमिक शाला खैरी (विकासखंड-साजा, जिला-बेमेतरा) के प्रधान पाठक श्री नेमी राम रजक की छत्तीसगढ़ी रचना ने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने अपनी कविता ‘हमर गोठ बात’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ी बोली की मिठास, संस्कृति और उसके संरक्षण की आवश्यकता को बड़े ही सरल और भावनात्मक तरीके से व्यक्त किया है।

‘मैना सुवा के गुरतुर बोली कस… मयारू छत्तीसगढ़ी बोली’

​श्री रजक ने अपनी रचना में छत्तीसगढ़ी भाषा की तुलना मैना और तोते (सुवा) की मीठी बोली से की है और कहा है कि यह ‘मयारू’ (प्यार भरी) बोली है। उन्होंने यहाँ के लोगों की हंसी-ठिठोली को ‘अमरइया (आम के बाग) की कोइली’ के समान मीठा बताया है, जो यहाँ की सादगी और प्रेम को दर्शाती है।

  • कविता का भाव: कविता दर्शाती है कि यहाँ दिन की शुरुआत बड़े फजर (बहुत सुबह) में राम नाम के साथ होती है और यह भाषा ‘मया-पिरीत के बंधना’ में सबको बाँधकर रखती है, इसलिए छत्तीसगढ़ी भाखा (भाषा) ‘सबले पोठ’ (सबसे श्रेष्ठ) है।

सादा जीवन, निश्छल वाणी

​नेमी राम रजक जी ने छत्तीसगढ़ी बानी (वाणी) को ‘बड़ मनभावन, निश्छल और पावन’ बताया है। उनकी पंक्तियाँ यहाँ के लोगों के चरित्र को दर्शाती हैं, जहाँ झूठ और लबारी (झूठ) अंतस में नहीं रहता और यहाँ का जीवन सादा होता है। यह रचना स्पष्ट करती है कि छत्तीसगढ़ी भाषा सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं, बल्कि यह यहाँ की निश्छल संस्कृति का आईना है।

राजभाखा पुरखों की थाती, संरक्षण ज़रूरी

​कविता का सबसे महत्वपूर्ण संदेश भाषा के संरक्षण और सम्मान से जुड़ा है। प्रधान पाठक नेमी राम रजक ने जोर दिया कि राजभाखा हमारे पुरखा (पूर्वजों) की थाती (विरासत) है और इसे जतन करके राखे ल परही (संभाल कर रखना पड़ेगा)

​उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि जब छत्तीसगढ़ी भाषा का उपयोग पढ़ाई-लिखाई (शिक्षा) और सरकारी काम-काज में होगा, तभे (तभी) छत्तीसगढ़िया का मान-सम्मान बढ़ेगा।

​इस अवसर पर, नेमी राम रजक ने सभी प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस की हृदय से बधाई दी। उनकी इस रचना ने राजभाषा दिवस के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया है और प्रदेशवासियों को अपनी बोली-भाषा के प्रति सम्मान और लगाव बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है।

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