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●बेरला के स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था का हाल बेहाल,अनुशासनहीनता व मनमानी पर परपोड़ा स्कूल के शिक्षकों को एबीईओ का नोटिस●*

*■बेमेतरा:-* बेरला विकासखंड के ग्राम परपोड़ा में स्कूलों के निरीक्षण के दौरान शैक्षिक लापरवाही की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। जिसमे सहायक विकासखंड अधिकारी नारायण ठाकुर और जनपद सदस्य नीरज राजपूत के द्वारा आकस्मिक निरीक्षण में शिक्षक और छात्र दोनों ही स्कूल समय का उल्लंघन करते पाए गए। जिससे परपोड़ा शियक्षेत्र शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगा है।दरअसल परपोड़ा गाँव के शासकीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक शाला में स्थानीय सजग जनप्रतिनिधियों एवं जिम्मेदार अफसरों की अकस्मात निरीक्षण में सुबह 7:35 बजे केवल 5 बच्चे की उपस्थिति स्कूल में पाई गई जप स्कूल प्रांगण में केवल संकुल समन्वयक ईश्वर निर्मलकर के साथ मौजूद थे। ततपश्चात स्कूल में सुबह 08 बजे के बाद प्राइमरी के प्रधान पाठक और अन्य शिक्षक भी 8 बजे के बाद धीरे-धीरे उपस्थित हुए। वही इस दौरान बच्चे भी 8:30 बजे तक पहुँच रहे थे। इस सम्बंध में बेरला एबीईओ नारायण ठाकुर ने इस लापरवाही पर सख्त होते हुए सभी संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात कही।*हायर सेकेंडरी स्कूल में भी अनुशासनहीनता का मामला*जबकि परपोड़ा के ही शासकीय चंद्रशेखर आजाद हायर सेकेंडरी स्कूल में प्राचार्य की स्कूल में एंट्री 10:30 बजे हुई। जिससे क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था के हकीकत पोल खुल गयी। वही अगली कड़ी में निरीक्षण टीम इसी गाँव के ही हायर सेकेंडरी स्कूल में जनपद सदस्य नीरज राजपूत ग्रामीणों के साथ सुबह 7:30 बजे निरीक्षण के लिए पहुँचे, लेकिन स्कूल पूरी तरह सुनसान था। जिसमे शिक्षकों की लेटलतीफी स्पष्ट देखने को मिली। इस दरम्यान शिक्षक बी.एल. कुर्रे 7:43 बजे और दिव्या देवांगन 8:05 बजे पहुँचीं।जबकि स्कूल में 8:10 बजे प्रार्थना हुई, जबकि उस समय तक केवल 2 से 4 बच्चे ही आए थे। वही स्कूल के प्रभारी प्राचार्य जे.एल. पारधी स्वयं सबसे अंत में, सुबह 10:30 बजे तक स्कूल पहुँचे, जो देखा जाए तो घोर अनुशासनहीनता है। वही इस स्कूल में बच्चे 8:30 बजे के बाद भी लगातार आ रहे थे, और उन्हें स्कूल शुरू होने का सही समय तक पता नहीं था। बच्चे पीछे महामाया मंदिर के पास आराम से बैठे पाए गए।*स्कूल में अनुशासनहीनता से जनप्रतिनिधि का आक्रोश* इस सम्बंध में स्थानीय निवासी एवं बेरला जनपद सदस्य नीरज राजपूत ने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी को कॉल के माध्यम से सूचना दी गई, पर कार्रवाई की गति धीमी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जी.पी.एस. कैमरा(समय, दिनांक, जगह सहित) के सबूत भेजने पर भी जिम्मेदार अधिकारी आँखें बंद कर लेते हैं। साथ ही जनपद सदस्य ने कहा कि जब जनप्रतिनिधि की बात नहीं सुनी जा रही है और सिस्टम सुधारा नहीं जा रहा है, तो आम नागरिक शिक्षा विभाग से कोसों दूर हैं। उन्होंने जोर दिया कि जब शिक्षक ही व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, तो बच्चों से अनुशासन की अपेक्षा करना व्यर्थ है। फिलहाल शिक्षा पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद, शिक्षकों और जिम्मेदार अधिकारियों की यह घोर लापरवाही बच्चों के भविष्य को गंभीर खतरे में डाल रही है।

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