बिलासपुर (छत्तीसगढ़): बिलासपुर जिले के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अब आवारा कुत्तों की निगरानी के साथ-साथ स्कूल परिसरों में सांप-बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं को आने से रोकने का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने इस संबंध में सभी प्राचार्यों और प्रधानपाठकों को आदेश जारी किया है, जिसने शिक्षक समुदाय में नाराजगी पैदा कर दी है।
🙅♀️ शिक्षकों ने आदेश को बताया ‘बेतुका’
प्राचार्य और हेडमास्टरों ने इस आदेश को बेतुका बताते हुए आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि वे पहले से ही शैक्षणिक और प्रशासनिक (SIR का काम) जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। अब कुत्ते पकड़वाने और उनकी निगरानी के बाद सांप-बिच्छू पर ध्यान देने की जिम्मेदारी सौंपना उनके मूल शैक्षणिक कार्य को प्रभावित करेगा।
🚨 टीचर्स एसोसिएशन ने जताया जान का खतरा
टीचर्स एसोसिएशन ने इस आदेश पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा, “कुत्तों के बाद अब सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीव-जंतुओं से शिक्षकों की जान को भी खतरा हो सकता है। सरकार को शिक्षकों की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। शिक्षकों को ऐसे जहरीले जंतुओं से कौन बचाएगा?”
⚖️ डीईओ बोले – यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे का कहना है कि यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी प्राचार्य और प्रधान पाठकों को इस आदेश का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा और इसके लिए सभी स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
यह नया आदेश शिक्षकों की सुरक्षा और उनके प्राथमिक शिक्षण कार्य की प्राथमिकता को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर रहा है।

