रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) में आज मध्य भारत के पहले क्लीनिकल फॉरेंसिक लैब का औपचारिक शुभारंभ किया गया। स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने इसका उद्घाटन किया। यह लैब अब जहर, नशा, ड्रग्स, अल्कोहल और मेडिकल केसों से जुड़े सैंपल्स की जांच करके आपराधिक मामलों के निराकरण में तेजी लाएगी।
⚖️ जांच में तेजी से न्याय में होगी आसानी
इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा कि यह क्लीनिकल फॉरेंसिक लैब देश का 12वां ऐसा संस्थान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस लैब के शुरू होने से अब फॉरेंसिक जांच के लिए छत्तीसगढ़ की दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी।
”छत्तीसगढ़ अब दूसरे राज्यों का भी सहारा बनेगा। यहां जहर, नशा, ड्रग्स, अल्कोहल और मैट (Medico Legal Cases) से संबंधित आने वाले केस की जांच होगी।”
— श्यामबिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री, छत्तीसगढ़
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इस लैब की रिपोर्ट कोर्ट में सबूत के तौर पर मान्य होगी। पहले रिपोर्ट की पेंडेंसी (लंबितता) के कारण मामलों की सुनवाई में सालों लग जाते थे, लेकिन अब जांच में तेजी आने से अपराधिक मामलों के निराकरण में भी तेजी आएगी।
🚨 आपराधिक मामलों के निराकरण में सीधा फायदा
स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा कि आज के समय में अपराध की प्रकृति बदल रही है। यह लैब अपराध की जांच और कार्रवाई में सटीक सूचना देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि यह राज्य का ऐसा संस्थान है, जहां एफटीए पेपर (FTA Paper) द्वारा खून का नमूना डीएनए जांच के लिए रखा जाएगा।
मेडिको लीगल केस के अंतर्गत किए जाने वाले इन सभी जांचों का सीधा फायदा पुलिस विभाग और न्यायालय को अपराधिक मामलों के निराकरण में मिलेगा।
🧪 इन 12 मादक पदार्थों की भी होगी जांच
यह नया फॉरेंसिक लैब शराब के अलावा विभिन्न प्रकार के मादक पदार्थों के सेवन की भी जांच करने में सक्षम होगा, जिनमें प्रमुख हैं:
- एम्फ़ैटेमिन
- बार्बिटुरेट्स
- बेंजोडायजेपिन
- कोकीन
- मारिजुआना
- मेथैम्फेटामाइन
- ओपियोड (हेरोइन)
- फेनसाइक्लिडीन (पीसीपी)
- मॉर्फिन
- मेथोडोन
- एक्सटेसी
- ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट
इस अवसर पर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुरंदर मिश्रा, दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुनील सोनी, चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी, अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर सहित फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ और फैकल्टी सदस्य मौजूद रहे।

