धमधा (दुर्ग)। दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में 9वीं कक्षा के एक छात्र का शव संदिग्ध हालत में मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। मृतक की पहचान तामेश्वर ठाकुर (16 वर्ष), निवासी सोनेसरार, धमधा के रूप में हुई है। छात्र का शव सोमवार को महाराजपुर चौक के पास मिला, जिसके बाद परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों में शोक के साथ-साथ स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ भारी आक्रोश फैल गया।

लापता छात्र का मिला शव
जानकारी के अनुसार, तामेश्वर ठाकुर शनिवार को अपने चाचा के साथ दुर्ग जाने के लिए घर से निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। परिजन उसकी तलाश कर ही रहे थे कि सोमवार को उसका शव महाराजपुर चौक के पास संदिग्ध परिस्थितियों में मिला।
सूचना मिलते ही धमधा थाना प्रभारी युवराज साहू अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए धमधा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो पाएगा और इसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
🚑 मुक्तांजलि वाहन न मिलने से बढ़ा विवाद
शव मिलने के बाद परिजनों को दूसरा बड़ा झटका अस्पताल में लगा। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने शव को घर ले जाने के लिए मुक्तांजलि वाहन (शव वाहन) की मांग की, लेकिन अस्पताल में वाहन उपलब्ध नहीं था, जिसके चलते मौके पर विवाद की स्थिति बन गई।
परिजनों ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा: “सरकारें स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे करती हैं, लेकिन धमधा जैसे ग्रामीण क्षेत्र में एक अदद शव वाहन तक उपलब्ध नहीं है। दुख की इस घड़ी में वाहन न मिलना हमारे जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। यह प्रशासन की घोर लापरवाही है।”
सीएमओ ने स्वीकारा वाहन का अभाव
इस मामले पर धमधा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. डी.पी. ठाकुर ने भी खंडन नहीं किया। उन्होंने बताया कि धमधा ब्लॉक में वर्तमान में एक भी मुक्तांजलि वाहन उपलब्ध नहीं है। उन्होंने परिजनों को टोल फ्री नंबर पर कॉल करने की सलाह दी, जिससे जिले से वाहन मंगवाया जा सके, लेकिन इसमें समय लगने की बात कही। सीएमओ के इस जवाब ने परिजनों के गुस्से को और बढ़ा दिया।
😔 ऑटो में ले जाना पड़ा शव, व्यवस्था पर उठे सवाल
अंततः, मजबूरी में मृतक के परिजनों को शव को ऑटो रिक्शा में रखकर ही घर ले जाना पड़ा। यह भावुक कर देने वाला दृश्य देख मौके पर मौजूद हर व्यक्ति द्रवित हो उठा। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली और सरकारी दावों की हकीकत को उजागर कर दिया है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर शव वाहन मिलता, तो परिजनों को इस अपमानजनक स्थिति से नहीं गुजरना पड़ता।
फिलहाल पुलिस मौत के कारणों की गहनता से जांच कर रही है।

