Gk न्यूज बेमेतरा| हिंदू धर्म में शक्ति की उपासना का विशेष पर्व ‘मासिक दुर्गाष्टमी’ इस बार साल के अंत में बेहद शुभ संयोग लेकर आ रहा है। वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, साल 2025 की अंतिम मासिक दुर्गाष्टमी पौष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाएगी। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण नंदन शर्मा (देवकर) के अनुसार, उदया तिथि की मान्यता के आधार पर यह व्रत और पूजन 28 दिसंबर को संपन्न होगा।तिथि और शुभ मुहूर्त: ज्योतिषीय गणनाज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण नंदन शर्मा ने पंचांग के हवाले से बताया कि पौष मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का समय इस प्रकार रहेगा:अष्टमी तिथि प्रारंभ: 27 दिसंबर 2025 को दोपहर 01:09 बजे से।अष्टमी तिथि समापन: 28 दिसंबर 2025 को सुबह 11:59 बजे तक।उदया तिथि का निर्णय: सनातन परंपरा में उदया तिथि का विशेष महत्व है। चूंकि 28 दिसंबर को सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन मां भगवती की आराधना और व्रत किया जाएगा।व्रत का धार्मिक व आध्यात्मिक महत्वपंडित कृष्ण नंदन शर्मा के अनुसार, मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत साधक को मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। मान्यता है कि इस पावन दिन मां दुर्गा स्वयं पृथ्वी पर विराजमान होकर भक्तों की श्रद्धा स्वीकार करती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। जो भक्त पूरी निष्ठा के साथ इस दिन मां की आराधना करते हैं, उनके जीवन से बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।पूजन विधि: मां को कैसे करें प्रसन्न?ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस दिन भक्तों को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर मां दुर्गा का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद:मां की प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध कर धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें।दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।व्रती को इस दिन सात्विक भोजन या फलाहार ग्रहण करना चाहिए।निशिता काल (मध्यरात्रि) की पूजा का भी विशेष महत्व है, जो गुप्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए की जाती है।”मां आदिशक्ति की कृपा से भक्तों के जीवन के समस्त कष्टों का निवारण होता है और आत्मबल में वृद्धि होती है।” — ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण नंदन शर्मा, देवकर

