
■बेमेतरा/बेरला:- पुलिस अनुविभागीय मुख्यालय बेरला के अंतर्गत इन दिनों सट्टेबाजी का अवैध कारोबार अपनी जड़ें तेजी से जमा रहा है। आलम यह है कि नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक करीब आधा दर्जन प्रमुख ‘हॉटस्पॉट’ पर प्रतिदिन लाखों रुपये का दांव लगाया जा रहा है। शासन-प्रशासन की सख्ती के दावों के बावजूद स्थानीय पुलिस और साइबर तंत्र इस नेटवर्क को ध्वस्त करने में अब तक नाकाम साबित हुए हैं।
क्षेत्र के युवाओं का भविष्य से खिलवाड़, दाँव पर क्षेत्र का सामाजिक वातावरण
चूंकि नगरीय निकाय सहित दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में फैले इस जाल की चपेट में सबसे ज्यादा युवा पीढ़ी आ रही है। रातों-रात अमीर बनने के लालच में युवा अपना कीमती समय और पैसा इस अवैध गतिविधि में बर्बाद कर रहे हैं, जिससे न केवल उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है, बल्कि क्षेत्र का सामाजिक वातावरण भी दूषित हो रहा है।
स्थानीय पुलिस व साइबर की टीम महज औपचारिक कार्रवाई तक सीमित
दरअसल हैरानी की बात यह है कि एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री और डीजीपी सट्टेबाजी के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने और कड़ी कार्रवाई के निर्देश देते हैं, वहीं बेरला क्षेत्र में इन आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस केवल छोटे-मोटे मोहरों पर औपचारिक कार्रवाई कर खानापूर्ति कर लेती है, जबकि मुख्य ‘खाईवाल’ अब भी पुलिस और साइबर टीम की पहुंच से बाहर हैं।
एसडीओपी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल
चूंकि नगर बेरला सहित आसपास के कुछ गाँवो में शाम ढलते ही सटोरिये अपने सुरक्षित ठिकानों और अड्डों पर जम जाते हैं। पुलिस अनुविभागीय कार्यालय (एसडीओपी) की नाक के नीचे चल रहे इस संगठित अपराध ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि आखिर किसके संरक्षण में ये सटोरिये बेखौफ होकर फड़ सजा रहे हैं? जो काफी गम्भीर एवं चिंताजनक विषय है।
सटोरियों पर कार्यवाही कर सट्टेबाजी पर विराम लगाने की पुलिस से ग्रामीणों की मांग
फिलहाल स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि यदि जल्द ही इस अवैध गतिविधि पर विराम नही लगाई गयी, तो क्षेत्र की छवि और अधिक धूमिल होगी। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इस बेरला सहित ग्रामीण इलाकों पर फैले अवैध नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या फिर सट्टे का यह खेल इसी तरह ‘दिन दूनी रात चौगुनी’ तरक्की करता रहेगा।
