रायपुर: छत्तीसगढ़ में आज से सरकारी व्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले प्रदेशभर के सरकारी कर्मचारियों ने तीन दिवसीय (29 से 31 दिसंबर) ‘काम बंद-कलम बंद’ आंदोलन का शंखनाद कर दिया है। इस आंदोलन में प्रदेश के 54 विभागों के हजारों कर्मचारी शामिल हैं, जिससे मंत्रालय से लेकर जिला कार्यालयों तक सन्नाटा पसरा हुआ है।
प्रमुख मांगें: महंगाई भत्ता और 11 सूत्रीय एजेंडा
कर्मचारियों के इस बड़े आंदोलन की मुख्य जड़ उनकी 11 सूत्रीय मांगें हैं। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि सरकार उनकी जायज मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज कर रही है। प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- महंगाई भत्ता (DA): केंद्र सरकार के समान देय तिथि से महंगाई भत्ते की मांग।
- वेतन विसंगति: विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर करना।
- पदोन्नति और अन्य लाभ: रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी और अन्य भत्तों का पुनरीक्षण।
इंद्रावती भवन में जोरदार प्रदर्शन
राजधानी रायपुर स्थित इंद्रावती भवन (संचालनालय) आज आंदोलन का मुख्य केंद्र बना रहा। सुबह से ही कर्मचारी भारी संख्या में एकत्रित हुए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण कार्यालयों में फाइलों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है। आम जनता को अपने सरकारी कामों के लिए दफ्तरों से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
प्रशासनिक कामकाज पर असर
फेडरेशन के नेताओं का दावा है कि इस आंदोलन से ब्लॉक स्तर से लेकर राज्य स्तर तक का प्रशासनिक ढांचा प्रभावित हुआ है। यदि इन तीन दिनों में सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो कर्मचारी संगठन भविष्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी भी दे रहे हैं।
”हम लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंप रहे हैं, लेकिन अब हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। जब तक केंद्र के समान डीए और हमारी अन्य 11 सूत्रीय मांगें पूरी नहीं होतीं, यह संघर्ष जारी रहेगा।” — फेडरेशन प्रतिनिधि

