ताज़ा खबर :

बेरला में पोल्ट्री फार्मों की गंदगी से ग्रामीणों का जीना मुहाल: प्रदूषण विभाग मौन, बीमारियों का बढ़ा खतरा

बेरला: बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक में संचालित मुर्गी फार्म इन दिनों स्थानीय ग्रामीणों के लिए जी का जंजाल बन चुके हैं। इन फार्मों से निकलने वाली असहनीय बदबू और प्रदूषण ने अंचल के लोगों का स्वास्थ्य संकट में डाल दिया है। आलम यह है कि नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे इन पोल्ट्री फार्मों पर लगाम कसने में पर्यावरण विभाग पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।

इन मार्गों और गांवों में सबसे ज्यादा बुरा हाल

​बेरला ब्लॉक के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में पोल्ट्री फार्मों का जाल बिछा हुआ है। विशेष रूप से:

  • करामाल-हतपान सड़क मार्ग
  • खर्रा, कुसमी और आनंदगांव
  • सुरहोली, सोरला चौक और कुंही मार्ग

​इन क्षेत्रों में स्थित फार्मों से निकलने वाली बीट (अपशिष्ट) और मरे हुए पक्षियों की बदबू ने राहगीरों और ग्रामीणों का सांस लेना मुश्किल कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा सालों से क्षेत्र में कोई मेडिकल कैंप नहीं लगाया गया है, जिससे बड़ी बीमारियों का डर बना हुआ है।

नियमों की धज्जियां उड़ा रहे संचालक

​पोल्ट्री फार्म संचालकों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। सुरहोली स्थित स्काईलार्क हैचरिज जैसे बड़े फार्मों की शिकायतें लगातार एसडीएम और तहसील कार्यालय में की जा रही हैं। पूर्व में एसडीएम पिंकी मनहर द्वारा जांच और कार्यवाही की गई थी, लेकिन स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं देखा गया है।

किसानों और कर्मचारियों की बढ़ी मुसीबत

​वर्तमान में धान खरीदी का सीजन चल रहा है। सेवा सहकारी समिति कुम्ही के पास संचालित पोल्ट्री फार्म से निकलने वाली दुर्गंध के कारण वहां आने वाले सैकड़ों किसान, समिति कर्मचारी और अधिकारी बेहद परेशान हैं। खर्रा में संचालित फार्मों की मशीनों से निकलने वाली अजीबोगरीब गंध ने लोगों का घरों में बैठना दूभर कर दिया है।

प्रवासी मजदूरों और सुरक्षा मानकों पर सवाल

​शिकायत यह भी है कि इन फार्मों में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर कार्य कर रहे हैं, जिनकी जानकारी स्थानीय पंचायत, तहसील या पुलिस थाने को नहीं दी गई है। श्रम विभाग और पशुपालन विभाग की लचर कार्यप्रणाली के कारण संचालक मनमानी पर उतारू हैं।

ग्रामीणों की मांग: “हम लंबे समय से इस गंदगी और मक्खियों के बीच रहने को मजबूर हैं। कई बार विरोध प्रदर्शन किया गया, लेकिन समाधान नहीं निकला। हमारी मांग है कि पर्यावरण विभाग के अधिकारी मौके पर आकर जांच करें और मानकों का उल्लंघन करने वाले संचालकों पर कड़ी कार्यवाही की जाए।”

खबर के लिए मुख्य बिंदु (Bullet Points):

  • प्रदूषण: खुले में बीट फेंकने से फैल रही है संक्रामक बीमारियां।
  • लापरवाही: पर्यावरण संरक्षण मंडल दुर्ग के अधिकारी नहीं कर रहे क्षेत्र का दौरा।
  • प्रभाव: धान खरीदी केंद्रों पर आने वाले किसान और कर्मचारी दुर्गंध से हलाकान।
  • मांग: तत्काल मेडिकल कैंप लगाने और संचालकों पर जुर्माने की मांग।
WhatsApp
Facebook
Telegram
X

ख़बर एवं विज्ञापन के लिए संपर्क करें

(संपर्क करें - 8817455556-9630244446)

और पढ़ें


धमधा की सड़कों पर गुंडागर्दी: पैसे मांगे तो निकाला चाकू, लुटेरों ने फैलाई दहशत।

धमधा। दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।…

बसना पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 1.37 करोड़ का गांजा जब्त, मध्यप्रदेश का तस्कर गिरफ्तार

​बसना/महासमुंद: जिले में अवैध नशा तस्करी के खिलाफ पुलिस ने एक बड़ी…

दुर्ग: सरकारी नौकरी का झांसा देकर 10 लाख की ठगी करने वाला दंपति गिरफ्तार

दुर्ग (पदमनाभपुर): जिला दुर्ग के पदमनाभपुर पुलिस ने नौकरी के नाम पर…

दुर्ग: बेजुबान कुत्ते की निर्मम हत्या, जामुल पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा

​जामुल (दुर्ग): जिला दुर्ग के जामुल थाना क्षेत्र से अमानवीयता का एक…