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{भिम्भौरी नगर पंचायत में स्पोर्ट्स बजट की दुर्गति, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी खिलाड़ियों की उम्मीदें,शासन के लाखों रुपये फूंकने के बाद भी खिलाड़ी प्यासे और बेहाल}
■बेमेतरा:- शासन-प्रशासन भले ही ग्रामीण स्तर पर खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए खेलो इंडिया जैसी योजनाओं के माध्यम से करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहा है। लेकिन धरातल पर जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ताजा मामला बेमेतरा जिले के बेरला विकासखण्ड अंतर्गत नगर पंचायत भिम्भौरी का है, जहाँ आनन्दगाँव मार्ग पर स्थित हाईस्कूल के करीब स्थानीय खिलाड़ियों की सुविधाओं के लिए आई करीब 3.99 लाख रुपये की राशि जिम्मेदारों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है, जिससे स्थानीय युवा खिलाड़ियों व खेलप्रेमियों के मन निराशा देखने को मिल रही है। जो काफी चिंता का विषय है।

◆कागजों पर क्रियान्वयन, धरातल पर अव्यवस्था
जानकारी के मुताबिक विगत वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिला खेल विभाग के माध्यम से तत्कालीन सरपंच ग्राम पंचायत बोरिया को कार्य एजेंसी बनाकर यहाँ विभिन्न निर्माण कार्य कराए गए थे। इसमें 2.20 लाख रुपये की लागत से चेंजिंग रूम, 95 हजार रुपये में शौचालय और 84 हजार रुपये समतलीकरण के लिए खर्च किए गए। लेकिन निर्माण के दो साल के भीतर ही यह प्रोजेक्ट अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। चेंजिंग रूम में न तो पंखे लगाए गए हैं और न ही कमरे के अंदर ज़रा बिजली-लाइट की व्यवस्था है।
शौचालय बना कबाड़खाना, पानी की बूंद को तरसते खिलाड़ी
फिलहाल हैरानी की बात यह है कि खिलाड़ियों की सुविधा के लिए बना शौचालय आज कबाड़खाने में तब्दील हो चुका है। यहाँ टॉयलेट की जगह स्पोर्ट्स सामग्रियों को कूड़े की तरह ठूंसकर रखा गया है। मैदान में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण खिलाड़ियों को घर से पानी की बोतलें लानी पड़ती हैं। उमस और थकान होने पर पंखा न होने के कारण खिलाड़ियों को बाहर जमीन पर बैठकर आराम करना पड़ता है।
अंधेरे के साये में भविष्य गढ़ने की मजबूरी
भिम्भौरी क्षेत्र खेल के लिहाज से जिले का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ के युवा हर साल पुलिस सेवा और सेना (आर्मी) में चयनित होकर क्षेत्र का नाम रोशन करते हैं। इसके बावजूद शासन द्वारा दी गई सुविधाओं का यह हाल है कि मैदान में प्रकाश (लाइटिंग) की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। शाम ढलते ही मैदान पर्याप्त रोशनी न होने से काफी परेशानी हो है। देखा जाए तो सीमित संसाधनों व उपकरणों के बीच खिलाड़ियों को जोखिम उठाकर अंधेरे में ही रिहर्सल करना पड़ता है।
जांच के घेरे में निर्माण एजेंसी और खेल विभाग
दरअसल स्थानीय खेलप्रेमियों और युवाओं में इस उपेक्षा को लेकर भारी आक्रोश है। आरोप है कि जिला खेल विभाग और निर्माण एजेंसी ने अपने निजी स्वार्थ के लिए खेल बजट का दुरुपयोग किया है। सूत्र बताते हैं कि जिले के अन्य गांवों में भी खेल मद से हुए कार्यों की स्थिति ऐसी ही है। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इन अनियमितताओं पर संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्रवाई करेगा या भविष्य के सितारे ऐसे ही अभावों के अंधेरे में प्रैक्टिस करने को मजबूर रहेंगे। इस सम्बंध में बेमेतरा सहायक ज़िला खेल अधिकारी उपेन्द्र सेंगर से संपर्क करने का प्रयास किया गया किन्तु उनके द्वारा कोई प्रतिक्रिया नही दी गयी।
