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स्व-जनगणना पोर्टल में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल करने की मांग, ‘जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी’ ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी): छत्तीसगढ़ी भाषा को मान-सम्मान और पहचान दिलाने की दिशा में ‘जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी’ ने एक बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को पार्टी के जिला अध्यक्ष तेजस जंघेल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री और जनगणना निदेशक के नाम जिलाधीश (कलेक्टर) को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में भारत सरकार द्वारा जारी ‘स्व-जनगणना पोर्टल’ (Self-Enumeration Portal) में मातृभाषा के कॉलम में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल करने की पुरजोर मांग की गई है।

विदेशी भाषाओं को जगह, पर छत्तीसगढ़ी की उपेक्षा क्यों?

​पार्टी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जनगणना पोर्टल में नेपाली जैसी विदेशी भाषा और आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं होने के बावजूद अंग्रेजी भाषा का उल्लेख है, लेकिन लगभग 3.5 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली छत्तीसगढ़ी भाषा को स्थान नहीं दिया गया है। पार्टी का तर्क है कि छत्तीसगढ़ी बोलने वालों की संख्या सिंधी, मणिपुरी, मैथिली और संस्कृत जैसी अनुसूचित भाषाओं से कहीं अधिक है।

ऐतिहासिक गौरव का हवाला

​ज्ञापन में छत्तीसगढ़ी के समृद्ध इतिहास का जिक्र करते हुए बताया गया कि हीरालाल काव्योपाध्याय ने 1885 में ही छत्तीसगढ़ी व्याकरण की रचना कर दी थी, जो हिंदी व्याकरण से भी पहले की है। साथ ही, 26 नवंबर 2007 से छत्तीसगढ़ी को राज्य की ‘राजभाषा’ का दर्जा प्राप्त है।

बहिष्कार और उग्र आंदोलन की चेतावनी

​जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जनगणना 2026-27 के फॉर्म और पोर्टल में छत्तीसगढ़ी भाषा को अनिवार्य रूप से शामिल नहीं किया गया, तो पूरे राज्य में जनगणना का बहिष्कार किया जाएगा। पार्टी ने कहा कि वास्तविक आंकड़ों के अभाव में राज्य की भाषाई पहचान को खतरा है, और यदि मांग पूरी नहीं हुई तो वे उग्र प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

मुख्य बिंदु:

  • मांग: स्व-जनगणना पोर्टल और जनगणना फॉर्म में ‘छत्तीसगढ़ी’ का विकल्प जोड़ा जाए।
  • तर्क: छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा और एमपी में करीब 3.5 करोड़ लोग बोलते हैं छत्तीसगढ़ी।
  • चेतावनी: मांग पूरी न होने पर राज्यव्यापी आंदोलन और जनगणना का बहिष्कार।
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