भिलाई/दुर्ग। बच्चों के सर्वोत्तम हित और किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख एवं संरक्षण) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आज दिनांक 06.06.2026 को पुलिस नियंत्रण कक्ष, भिलाई में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विधि से संघर्षरत बालकों एवं बाल अपराधों से जुड़े लंबित प्रकरणों की समीक्षा की गई और थानों में तैनात बाल कल्याण अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला के मुख्य बिंदु
कार्यशाला का आयोजन किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत बच्चों के भविष्य सुधारने और अपराधों में कमी लाने के लक्ष्य के साथ किया गया। इसमें निम्नलिखित विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया:
- बाल हितैषी वातावरण: सभी थानों में बाल हितैषी कक्ष (Child Friendly Rooms) को सुव्यवस्थित करने और घुमंतू बालकों के लिए अनिवार्य रूप से रजिस्टर संधारण करने का निर्देश दिया गया।
- डेटा प्रबंधन: पिछले एक वर्ष के बाल अपराधों से जुड़े प्रकरणों के डेटा को अपडेट करने के निर्देश दिए गए।
- मानसिक सुधार: विधि से संघर्षरत बालकों के बेहतर मानसिक विकास हेतु खेल गतिविधियों का आयोजन करने तथा उनकी काउंसलिंग के लिए ‘सेफ जोन’ चिन्हित करने की योजना बनाई गई।
- विशेष प्रशिक्षण: यूनिसेफ की टीम ने बाल कल्याण अधिकारियों को बाल संबंधी अपराधों की विवेचना और कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से प्रशिक्षित किया।
कानूनी प्रक्रियाओं की बारीकियां

उपनिदेशक अभियोजन बी. एस. राजपूत ने किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 और इसके नियमों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि बालकों की ‘सामाजिक पृष्ठभूमि रिपोर्ट’ (Social Background Report) को अत्यंत गंभीरता और सटीकता के साथ कैसे भरा जाए, ताकि बच्चों के सर्वोत्तम हितों की रक्षा की जा सके।
जुलाई में प्रस्तावित ‘कन्वर्जेंस बैठक’ हेतु लक्ष्य
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) सुखनंदन राठौर ने कार्यशाला के दौरान सभी थानों के लिए जुलाई 2026 में होने वाली ‘कन्वर्जेंस बैठक’ से पूर्व की तैयारी का लक्ष्य तय किया। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बाल सुरक्षा से संबंधित सभी पेंडिंग कार्यों और प्रशासनिक लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करें।
इस कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) सुखनंदन राठौर, उप पुलिस अधीक्षक (S.J.P.U.) श्रीमती चित्रा वर्मा, उपनिदेशक अभियोजन बी. एस. राजपूत, ए.डी.पी.ओ. शैलेन्द्र सिंह परिहार, यूनिसेफ की टीम और दुर्ग जिले के समस्त थानों के बाल कल्याण अधिकारी उपस्थित थे।
