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●बेरला के इकलौते शासकीय हॉस्टलों का बुरा हाल, तीन कमरों में रहने को मजबूर कन्या छात्रावास के 80 से अधिक छात्र, जिम्मेदार बेपरवाह●

◆(आदिवासी विकास विभाग की निष्क्रियता के कारण बेरला क्षेत्र में अनुसूचित जाति के बच्चे सुविधाओं से वंचित)◆

■बेमेतरा:- जिले के बेरला विकासखंड में स्थित शासकीय गर्ल्स और बॉयज हॉस्टलों की स्थिति बेहद दयनीय और चिंताजनक बनी हुई है। आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले इन छात्रावासों में प्री-मैट्रिक कन्या, पोस्ट-मैट्रिक कन्या और प्री-मैट्रिक बालक हॉस्टल शामिल हैं, जो वर्तमान में गंभीर जीर्णोद्धार की मांग कर रहे हैं। चूँकि लंबे समय से इन बुनियादी समस्याओं पर शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग द्वारा कोई ठोस ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

दरअसल जानकारी के अनुसार, बेरला के अनुसूचित जाति प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक कन्या छात्रावासों की आधिकारिक क्षमता 50-50 सीटों की है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि महज तीन कमरों के छोटे से भवन में करीब 80 छात्राएं रहने और पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इसी तरह, प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास में 20 सीटों की क्षमता के विरुद्ध 20 छात्र पंजीकृत हैं। इसके अलावा, पूरे बेरला ब्लॉक में बेरला को छोड़कर अन्य किसी भी क्षेत्र में सरकारी हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध नहीं होना एक गंभीर विषय है।

फिलहाल बेरला स्थित हॉस्टल भवन की इस भारी कमी को लेकर जब प्री एवं पोस्ट-मैट्रिक कन्या छात्रावास की अधीक्षिका मंजूषा धनगढ़ से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि पोस्ट-मैट्रिक कन्या छात्रावास के नए भवन निर्माण के लिए स्थल चिन्हाकित करते हुए शासन स्तर पर स्वीकृति मिल चुकी है, और अब केवल निर्माण कार्य शुरू होने का इंतजार है। वहीं प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के अधीक्षक दिगेंद्र कांत वर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं के चलते फिलहाल कन्या छात्रावास की बिल्डिंग में बॉयज हॉस्टल और बॉयज हॉस्टल की बिल्डिंग में कन्या छात्रावास संचालित किया जा रहा है।

जबकि बेरला क्षेत्र के रहवासियों और आम ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि कई ग्रामीण इलाके आदिवासी विकास विभाग की अनदेखी का शिकार हैं, जिससे अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा संबंधी उचित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

इस पूरे गंभीर मामले में जब बेमेतरा के आदिवासी विकास कल्याण विभाग के सब इंजीनियर सत्यनारायण ताम्रकार और सहायक आयुक्त अभिषेक जायसवाल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनकी ओर से कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

बहरहाल क्षेत्र के नागरिकों और छात्रहित में यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि शासन और प्रशासन तुरंत इस मामले पर संज्ञान लें। बेरला में न केवल जर्जर हॉस्टलों का तत्काल जीर्णोद्धार किया जाना चाहिए, बल्कि बढ़ती छात्र संख्या को देखते हुए नए भवनों के निर्माण कार्य को तेजी से पूरा किया जाए और आवश्यकतानुसार पोस्ट-मैट्रिक बॉयज हॉस्टल की भी नई घोषणा की जाए ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

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