
■बेमेतरा:- बेरला विकासखण्ड सहित समूचे बेमेतरा ज़िले के लाइफलाइन शिवनाथ व उसकी सहायक खारून नदी के मध्य स्थित उपजाऊ मैदानी क्षेत्र पर इन दिनों तांदुला जलसंसाधन दुर्ग संभाग की निष्क्रियता एवं उदासीनता का खामियाजा क्षेत्रवासियों को भुगतना पड़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि बेमेतरा जिले के बेरला विकास खंड के अंतर्गत आने वाले सोन, खर्रा, चंडी, पिरदा और गोढ़ी जैसे ग्रामीण अंचलों में सिंचाई व्यवस्था और संरचनाओं की जिम्मेदारी दुर्ग तांदुला सब डिवीजन नंबर 04 के अधीन है। इसी क्षेत्र में दशकों पूर्व सिंचाई विभाग द्वारा किसानों और विभागीय कार्यों की सुगमता के लिए कई निरीक्षण गृह (रेस्ट हाउस) बनवाए गए थे। लेकिन आज देखरेख और जीर्णोद्धार के अभाव में ये ऐतिहासिक इमारतें खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। वही विभागीय उदासीनता के चलते इनमें से कई निरीक्षण गृहों का परिसर आज अवैध अतिक्रमण की चपेट में आ गया है, जिससे सरकारी संपत्ति का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

देखा जाए तो वर्तमान में इन विश्राम गृहों की हालत इतनी दयनीय हो चुकी है कि यह क्षेत्र असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। अंग्रेजों के जमाने या शुरुआती दशकों से निर्मित इन पुराने जर्जर इमारतों के कभी भी ढहने या धंसने की आशंका बनी रहती है, जिससे आसपास के लोगों के लिए बड़ा हादसा होने का खतरा मंडरा रहा है। इस गंभीर स्थिति के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस पहल न होना प्रशासनिक लापरवाही और लचर कार्यशैली को उजागर करता है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि लंबे समय से उपेक्षित इन भवनों की सुध न लेने से विभाग की निष्क्रियता साफ झलकती है।
हालाँकि इस पूरे मामले पर तांदुला उप-संभाग 04 के एसडीओ रोहन शाह से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि बेरला क्षेत्र में स्थित सभी निरीक्षण गृहों की मरम्मत एवं जीर्णोद्धार का प्रस्ताव उच्च विभाग को भेज दिया गया है। प्रशासनिक स्तर पर बजट की स्वीकृति मिलते ही इन सभी निरीक्षण गृहों का पुनरुद्धार और सुधार कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
फिलहाल क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था से इस तांदुला जलसंसाधन डिविजन से सम्बन्धित अधिकारियों के इस आश्वासन के बीच स्थानीय किसानों और आम जनता में इस बात को लेकर भी गहरा रोष है कि सिंचाई से जुड़ी हर छोटी-बड़ी समस्या या काम के लिए उन्हें दुर्ग का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जबकि प्रशासनिक रूप से अब यह क्षेत्र बेमेतरा जिले के अधीन आता है।
चूंकि इस सम्बंध में क्षेत्र के स्थानीय किसानों और नागरिकों की प्रमुख मांग है कि दुर्ग में संचालित होने वाले इस कार्यालय को अब बेरला या बेमेतरा जिले में ही स्थानांतरित किया जाए ताकि क्षेत्रीय किसानों को अनावश्यक रूप से मीलों दूर दुर्ग के चक्कर न काटने पड़ें। शिवनाथ-खारून के इस बेल्ट के किसान लंबे समय से प्रशासनिक दूरी और उपेक्षा का शिकार होते आ रहे हैं, ऐसे में शासन-प्रशासन को जल्द से जल्द जर्जर निरीक्षण गृहों के जीर्णोद्धार के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर कार्यालय संचालन की दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए।
