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*बेरला में ट्रांसफार्मर बदलते वक्त बड़ा हादसा: विद्युत ठेकाकर्मी की करंट से दर्दनाक मौत, मुआवजे की मांग को लेकर कर्मा माता चौक पर चक्काजाम और 10 लाख पर बनी सहमति

■बेमेतरा:- साजा विद्युत संभाग अंतर्गत बेरला सब-डिवीजन के सरदा डीसी क्षेत्र में मंगलवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया जिसमे तारालिम गाँव के पास एक प्राइवेट बाड़ी में विद्युत ट्रांसफार्मर बदलने के दौरान विभागीय लापरवाही के चलते 11000 वोल्ट की चपेट में आने से एक विद्युत ठेकाकर्मी की मौके पर ही अकस्मात दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना में मृतक की पहचान हेमचंद साहू (उम्र 35 वर्ष), निवासी लेंजवारा के रूप में हुई है, जो अटल ज्योति 11 केवी लाइन फीडर तारालिम के अंतर्गत कार्यरत था। घटना के बाद बेरला थाने की पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर पंचनामा तैयार किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए बेरला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजकर आगे की जांच शुरू कर दी है।

इस आकस्मिक और दर्दनाक हादसे के विरोध तथा विभागीय लापरवाही के खिलाफ बुधवार को नगर मुख्यालय बेरला के कर्मा माता चौक पर भारी आक्रोश देखने को मिला। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार पार्टी के समस्त सेनानियों ने उग्र प्रदर्शन करते हुए मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। इस दौरान बेरला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और मुख्य मार्ग पर विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों की अगुवाई करने वालों में निलेश साहू (जिला अध्यक्ष फौजी), सूर्या चौहान (बेमेतरा शहर अध्यक्ष), धनंजय निषाद (बेरला ब्लॉक अध्यक्ष), पुरेद साहू, गजेंद्र निषाद, छमन साहू सहित बड़ी संख्या में क्रांति सेना के कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

दरअसल बेरला में मुख्य मार्ग पर छत्तीसगढ़ढ़िया क्रान्ति सेना इस जोरदार प्रदर्शन और चक्काजाम की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। इस दौरान साजा के डीई मनीष कुमार शुक्ला, बेरला के एई देवसिंह ठाकुर, भिंभौरी एई तथा सरदा/बेरला की जेई खुशबू साहू सहित बेरला और कंडरका चौकी का पुलिस बल सुरक्षा व्यवस्था संभालने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौजूद रहा। जिसमे अधिकारियों और आक्रोशित ग्रामीणों के बीच लंबी चर्चा चली, जिसमें सुरक्षा में चूक और विभागीय लापरवाही के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। चूँकि शुरुआती विरोध प्रदर्शन के दौरान छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना बेमेतरा और परिजनों द्वारा मृतक के परिवार के लिए आर्थिक मुआवजे की मांग उठाई गई। घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और विद्युत विभाग के प्रबंधकों के साथ हुई गहन वार्ता के अंत में विभाग द्वारा मृतक के परिवार को मुआवजे के रूप में करीब 10 लाख रुपये देने पर सहमति बन गई है, जिसके बाद स्थिति शांत हुई।

फिलहाल इस दुखद घटना ने बिजली विभाग के मैदानी कार्यों में बरती जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था और ठेकाकर्मियों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों और संगठनों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए विभाग को पुख्ता सुरक्षा मानक और सख्त दिशानिर्देश लागू करने चाहिए ताकि किसी अन्य मजदूर को अपनी जान न गंवानी पड़े।

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