डोंगरगढ़ (राजनांदगांव):
थाना डोंगरगढ़ पुलिस ने ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश कर भारी मुनाफे का झांसा देकर दो महिलाओं से कुल 36,70,000 रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
ठगी का तरीका और मामले का विवरण
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी कैलाश सेठी ने “प्योर ट्रेडिंग” नाम से एक कंपनी बनाई थी। उसने क्षेत्र की दो महिलाओं को इस कंपनी में पैसे निवेश करने पर तगड़ा मुनाफा कमाने का लालच दिया।
- पहला मामला (अपराध क्र. 413/2026): डोंगरगढ़ निवासी प्रार्थिया प्रतिमा पाल ने शिकायत दर्ज कराई कि आरोपी ने 30 मई 2023 से 04 मई 2025 के बीच उनसे कुल 27,50,000 रुपये ऑनलाइन और नगद के रूप में लिए। इसमें से आरोपी ने लगभग 19,00,000 रुपये तो वापस कर दिए, लेकिन शेष 8,50,000 रुपये हड़प लिए और मांगने पर टालमटोल करने लगा।
- दूसरा मामला (अपराध क्र. 414/2026): इसी प्रकार, डोंगरगढ़ की ही दूसरी प्रार्थिया नमिता चौबे से आरोपी ने 07 फरवरी 2023 से 07 मई 2025 के बीच कुल 55,00,000 रुपये लिए। इसमें से लगभग 26,80,000 रुपये लौटाए गए, जबकि शेष 28,20,000 रुपये वापस नहीं किए गए।
दोनों मामलों को मिलाकर कुल 82,50,000 रुपये का लेन-देन हुआ, जिसमें से 45,80,000 रुपये वापस करने के बाद भी 36,70,000 रुपये की धोखाधड़ी की गई। पुलिस ने दोनों मामलों में बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 318(4) और 238 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
गिरफ्तार आरोपी की जानकारी
- नाम: कैलाश सेठी (उम्र 37 वर्ष)
- पिता का नाम: बिगनेश्वर सेठी
- स्थाई पता: क्वार्टर नंबर 09, स्टेट 33, सेक्टर-10
- वर्तमान पता: मीनाक्षी नगर, चंद्राकर भवन के पास, दुर्ग, जिला दुर्ग (छ.ग.)
पुलिस कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव अंकिता शर्मा के दिशा-निर्देश, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर के मार्गदर्शन और एसडीओपी डोंगरगढ़ केशरी नंदन नायक के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी/प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक सुमन जायसवाल के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई।
विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने पर पुलिस ने आरोपी को 30 सितंबर 2026 को गिरफ्तार कर लिया और 01 अक्टूबर 2026 को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। इस पूरी कार्रवाई में सउनि धन्ना सिन्हा, आरक्षक अरुण मनहर, आरक्षक तिलक कवर और महिला आरक्षक सुषमा मराठे का विशेष योगदान रहा।
